जिले में हर साल हो रही रामलीला का इतिहास पुराना है। यहां रामलीला मंचन की शुरुआत 1890 में हुई थी। तब से लगातार शारदीय नवरात्र पर्व के साथ इसका शुभारंभ किया जाता रहा है। पिछले 60 सालों से अयोध्या से आए कलाकार रामलीला के विभिन्न चरित्रों का मंचन करते हैं। यह आयोजन 14 दिनों तक अनवरत चलता है।
बताया जाता है कि वर्ष 1890 में स्थानीय लोगों ने रामलीला का आयोजन शुरू किया। तब से लगातार हर वर्ष विधि विधान से शारदीय नवरात्र में रामलीला का मंचन होता है। जिले की रामलीला को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है।
तकरीबन 60 वर्षों से अयोध्या के कलाकार रामलीला के चरित्रों का नाट्य मंचन कर रहे हैं। श्री श्री 108 बाबा सागरदास आदर्श रामलीला मंडल हनुमानगढ़ी अयोध्या के कलाकार प्रमुख रूप से अभिनय में शामिल होते हैं। प्रबंधक महंथ शिव सिंह के नेतृत्व में अभिनयकर्ताओं की टीम नाट्य मंचन के पूर्व संवाद और प्रस्तुति का अभ्यास करती है। कलाकारों का कहना है कि भावपूर्ण दृश्यों के जीवंत स्वरूपों को प्रकट करना ही उनका ध्येय रहता है। मंच पर पहुंचने के बाद स्वयं को चरित्र के अनुसार ढालना किसी चुनौती से कम नहीं है।
रामलीला में 1.25 लाख होंगे खर्च
पिछले वर्ष की रामलीला मंचन के आयोजन में तकरीबन 70 हजार रुपये का खर्च आया था। इस बार महंगाई के चलते नाट्य मंचन का बजट भी बढ़ा है। आयोजन समिति के पदाधिकारी पं. रामउजागिर तिवारी ने बताया कि इस बार नाट्य मंचन में तकरीबन एक लाख 25 हजार रुपये का खर्च आंका गया है। खर्च का वहन रामलीला समिति के पदाधिकारियों व जनसहयोग से पूर्ण किया जाता है।