हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भी जिले के गन्ना किसानों को 14 दिन के भीतर भुगतान नहीं मिल पा रहा है। चीनी मिल समय से किसानों को 10 करोड़ तीन लाख 79 हजार रुपये का भुगतान नहीं कर सकी है। भुगतान समय से नहीं मिलने से किसानों की खेती-किसानी का कार्य बाधित हो रहा है। जर्जर मिल में पेराई सुस्त रफ्तार से चल रही है। चीनी मिल की बदहाली से किसानों का गन्ना की खेती से मोहभंग हो रहा है।
जिले की इकलौती किसान सहकारी चीनी मिल में तीन दिसंबर 2016 को गन्ना पेराई शुरू कराई गई थी। मिल की एक दिन की गन्ना पेराई करने की क्षमता 12.50 क्विंटल है। चीनी मिल के लिए पेराई सत्र में 15 लाख क्विंटल गन्ना की पेराई करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जर्जर कल-पुर्जे के सहारे चल रही चीनी मिल आए दिन तकनीकी खराबी समेत अन्य कारणों से ठप हो जा रही है।
अभी तक मिल में सात लाख पांच हजार दो सौ क्विंटल गन्ना की पेराई कराई गई है। गन्ना की खेती के भरोसे खेती-किसानी समेत अन्य कार्य करने वाले किसानों को निराशा हाथ लग रही है। किसानों का गन्ना मूल्य का भुगतान करने में चीनी मिल फिसड्डी साबित हो रही है। हाईकोर्ट ने किसानों का गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिन के अंदर करने का आदेश दिया है। सरकार भी किसानों को निर्धारित समय में पेंमेट कराने का दावा कर रही है।
इसके बावजूद किसानों को निर्धारित समय से भुगतान नहीं मिल पा रहा है। हालत यह है कि चीनी मिल किसानों को 10 करोड़ तीन लाख 79 हजार रुपये का भुगतान नहीं कर सकी है। किसान बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान पाने के लिए चीनी मिल से लेकर बैंकों तक का चक्कर काट रहे हैं। ऐसे में किसानों का गन्ना की खेती से मोहभंग होता जा रहा है।