मनोवैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार मिश्र
सुल्तानपुर। यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट व हाईस्कूल के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद बहुत से बच्चों ने उम्मीद से कम अंक हासिल किए हैं। ऐसे में बच्चों के लिए मनोवैज्ञानिक की सलाह है कि वे अपने अंदर छिपे टैलेंट को पहचानें। हार को एक सबक के रूप में लें और निराश व उदास होने के बजाय अपनी पसंद की दिशा में आगे बढ़ें। अभिभावक भी बच्चों को डांटने, शर्मिंदा करने व अकेला छोड़ने के स्थान पर उनकी हौसला अफजाई करें, और फिर से कोशिश करने के लिए प्रेरित करें।
कमला नेहरू संस्थान के मनोविज्ञान के प्रोफेसर डॉ. अतुल कुमार मिश्र ने बताया कि जो छात्र और छात्राएं किसी कारण फेल हो गए हैं या फिर जिन्हें अपेक्षा के अनुरूप अंक नहीं मिले हैं, उन्हें निराश और हताश होने की कतई जरूरत नहीं है। ऐसा संभव है कि मेहनत करने के बावजूद किसी कारण उनके पेपर अच्छे नहीं हो पाए हों। कोई पारिवारिक, शारीरिक या आर्थिक परेशानी रही हो। जो विषय उन्हें दिलाए गए हों, उनमें रुचि न होने के कारण उनका मन नहीं लगता हो। इस कारण वे परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके।
कहा बेशक, असफलता निराश और दुखी करती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि छात्र छात्राएं आगे कुछ और नहीं कर सकते या फिर उनके भीतर कोई प्रतिभा है ही नहीं। अपने माता-पिता से झूठ बोलने, परीक्षा में नकल करके पास होने या अध्यापकों से बहाने बनाने की बजाय बच्चे जैसे हैं, खुद को वैसे ही रखने की कोशिश करें और अपने टैलेंट को पहचानें।