विंदेश्वरीगंज (सुल्तानपुर)। जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर बल्दीराय विकास खंड के महादेवन स्थित बाबा मौलेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना के ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलते हैं, लेकिन मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना माना जाता है। इस मंदिर का जीर्णोद्घार मुगल शासक औरंगजेब के काल में राजा मल ने कराया था।
जीर्णोद्घार के समय हो रही खोदाई में शिवलिंग दिखाई पड़ा था। मंदिर परिसर में स्थित सराय (सगरा) में स्नान करने से ही चर्मरोग से मुक्ति मिल जाती है। बाबा मौलेश्वरनाथ में दर्शन करने और जल चढ़ाने से भक्तों पर बाबा भोले शंकर की कृपा बरसती है। यहां सावन माह में कई जिलों से लोग दर्शन करने और जल चढ़ाने आते हैं।
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मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर
जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूरी पर स्थित बल्दीराय थाने के महादेवन गांव में बाबा मौलेश्वरनाथ मंदिर स्थापित है। यहां पहुंचने के लिए कूरेभार, हलियापुर होते हुए मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। यहां सुल्तानपुर के साथ फैजाबाद, रायबरेली, अमेठी समेत कई जिलों के लोग दर्शन करने पहुंचते हैं।
मंदिर स्थापना के साक्ष्य नहीं
मंदिर स्थापना के साक्ष्य तो मौजूद नहीं है लेकिन सैकड़ों वर्ष पुराना मंदिर बताया जाता है। मंदिर के बगल के गांव मातादीन का पुरवा के 80 वर्षीय बुजुर्ग रामतेज पांडेय बताते हैं मंदिर का जीर्णोद्घार राजा मल ने कराया था। पांडेय की मानें तो उनके बुजुर्ग मंदिर के बारे में बताते थे कि औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त करवा दिया था। राज मल ने मंदिर का जीर्णोद्घार कराया। जीर्णोद्घार के समय खुदाई के दौरान शिवलिंग स्वत: प्रकट हो गया। करीब 50 फिट की खुदाई के बाद एक तामपत्र मिला था। उसे पढ़ाने के लिए काशी ले जाया गया था। इसके बाद मंदिर का जीर्णोद्घार फैजाबाद जिले के गोकुल गांव निवासी श्रीपाल सिंह ने 1940 में कराया था। मंदिर परिसर में इसका पत्थर भी लगा है।