सुल्तानपुर। परिषदीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत 6180 रसोइयों की दिवाली मानदेय न मिलने की वजह से फीकी रहने की संभावना है। रसोइयों को पांच माह का मानदेय नहीं मिला है। आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे रसोइया दैनिक खर्च चलाने के लिए कर्ज लेने पर मजबूर हैं।
परिषदीय प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय, राजकीय विद्यालय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना संचालित होती है। कुल 2195 विद्यालयों में 6180 रसोइयां कार्यरत हैं। रसोइयों को साल भर में 10 माह का मानदेय 1500 रुपये की दर से प्रतिमाह भुगतान किया जाता है। जिले में रसोइयों को अप्रैल, जुलाई, अगस्त, सितंबर एवं अक्तूबर का मानदेय नहीं मिला है। 6180 रसोइयों को मानदेय भुगतान करने के लिए कुल चार करोड़ 63 लाख 50 हजार रुपये की आवश्यकता है। मानदेय न मिलने से रसोइया आर्थिक तंगी के शिकार हैं। दैनिक खर्च चलाने के लिए रसोइयों को विद्यालय के स्टॉफ एवं सगे-संबंधियों से कर्ज लेना पड़ रहा है।
रसोइयों को उम्मीद थी कि रुका हुआ मानदेय मिल जाएगा तो दिवाली का पर्व अच्छा जाएगा। रसोइयों की उम्मीदों पर पानी फिरता हुआ दिख रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रसोइयों को मानदेय भुगतान के लिए फंड की डिमांड बीएसए कार्यालय की ओर से अब तक चार बार भेजी जा चुकी है लेकिन बजट आवंटित नहीं हुआ है। जिला समन्वयक एमडीएम संदीप यादव ने बताया कि गूगल सीट पर डिमांड समय-समय पर भेजी जा रही है लेकिन अभी तक पैसा नहीं आया है।