कार्यक्रम में कथाकार संजीव को सम्मानित करते कवि डॉ. डीएम मिश्र।
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सुल्तानपुर। शहर के जिला पंचायत सभागार में रविवार को संजीव अमृत महोत्सव समिति व सृजन पीठ साहित्यिक संस्था की ओर से संजीव नागरिक अभिनंदन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम दो सत्र में चला। आसपास के अलावा दूरदराज से आए कवियों व साहित्यकारों ने कथाकार संजीव के बारे में अपनी बात रखी।
पहले सत्र में नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम का संचालन करते हुए कवि डॉ. डीएम मिश्र ने उनके कृतित्व व प्रकाश डालते हुए कहा कि संजीव प्रेमचंद की परंपरा के महत्वपूर्ण कथाकार हैं। अपनी कहानियों और उपन्यासों के जरिए उन्होंने सामाजिक बुराइयों पर जोरदार प्रहार किया है। कथाकार शिवमूर्ति ने कहा कि संजीव वंचित तबके के नायकों को अपनी रचनाओं का वर्ण्य विषय बनाया। आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा कि संजीव ने प्रेमचंद की परंपरा का अतिक्रमण भी किया है और विस्तार भी। कथाकार अखिलेश ने कहा कि असहमति के विरुद्ध लिखना ही इनके लेखन का प्रस्थान बिंदु है। कथाकार राकेश ने उन्हें अपने समय का बड़ा कथाकार बताया। कथाकार शिवकुमार यादव के कहानी संग्रह ‘भूर भू स्वाहा’ का विमोचन भी किया गया। कवि अष्टभुजा शुक्ल बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। दूसरे सत्र में साहित्यकार कमल नयन पांडेय ने कहा कि संजीव आत्मस्थापना की कुंठा से मुक्त हैं। संजीव को खोजी प्रवृत्ति का कथाकार कहा जाता है।
रांची से आए आलोचक रविभूषण ने कहा कि संजीव पीड़ा और बेचैनी के कथाकार हैं। अष्टभुजा शुक्ल ने कहा कि संजीव ने स्थानीयता को वैश्विक बृहत्तर स्तर का बना दिया। कमला नेहरू संस्थान के प्राचार्य प्रो. राधेश्याम सिंह ने कहा कि उनकी कहानियां अत्यंत विश्वसनीय हैं। मुरादाबाद से आए उर्दू के कथाकार नदीम राइनी ने आश्वस्त किया कि वे संजीव की कहानियों का उर्दू में जल्दी ही अनुवाद करेंगे। कवि व आलोचक रघुवंशमणि ने कहा जब तक समाज में असमानता और गरीबों का शोषण हो रहा है, संजीव की कहानियां हम सबके बीच मजबूती से खड़ी हैं। रामप्यारे प्रजापति ने कहा कि संजीव प्रतिरोध के कथाकार हैं। सूर्यदीन यादव ने कहा कि संजीव अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कथाकार हैं। डॉ. सुशील कुमार पांडेय साहित्येंदु ने संजीव के कथा साहित्य को उच्च कोटि का बताया।
कवि हरेंद्र मौर्य ने कहा कि इनकी कहानियों में भविष्य की चिंता की आहट सुनाई देती है। अंत में कथाकार संजीव ने आयोजकों, वक्ताओं और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। संजीव अमृत महोत्सव के संयोजक आसनसोल से आए साहित्यकार शिवकुमार यादव ने अतिथियों और श्रोताओं का स्वागत किया। इस मौके पर आशाराम जागरथ, डॉ. आद्या प्रसाद प्रदीप, डॉ. ओंकार नाथ द्विवेदी, डॉ. मन्नान सुल्तानपुरी, सोमेश शेखर, हरीलाल शुक्ल, प्रेमपुष्प मिश्र आदि साहित्यकार मौजूद रहे।