सुल्तानपुर। गर्मी बढ़ते ही जिले में बिजली की डिमांड करीब 275 मेगावाट तक पहुंच गई है। मांग के सापेक्ष विद्युत वितरण को करीब 200 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध हो पा रही है। मांग और आपूर्ति में अंतर बढ़ने से जिले की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है। उपलब्धता में कमी से ग्रामीण क्षेत्रों में पीक ऑवर्स में बिजली कटौती शुरू हो गई है। अधिक जरूरत के समय बिजली कटौती के करके इंजीनियर अपने संयंत्रों को बचाने की कोशिश में जुटे हैं।
जिले में लगातार बढ़ रहे तापमान से गर्मी चरम पर पहुंच गई है। अप्रैल माह में अधिकतम तापमान करीब 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। न्यूनतम तापमान भी 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास टिका है। तेज धूप व पछुआ हवा से तापमान में लगातार हो रही वृद्धि से गर्मी चरम पर पहुंच गई है। गर्मी बढ़ते ही विद्युत खपत में इजाफा हुआ है। गर्मी से बचाव के उपकरण शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक चलने से लगातार बिजली की मांग बढ़ रही है। मौजूदा समय में बढ़ी गर्मी से विद्युत की मांग 275 मेगावाट के करीब पहुंच गई है। मांग के सापेक्ष जिले को करीब 200 मेगावाट ही बिजली मिल पा रही है।
मांग और आपूर्ति में करीब 75 मेगावाट का अंतर आने से विद्युत आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है। उपलब्धता कम होने से बिजली की कटौती शुरू हो गई है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अंधाधुंध कटौती चल रही है। बिजली की कमी का असर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ तहसील व शहर पर भी पड़ना शुरू हो गया है। तहसील के साथ जिला मुख्यालय पर भी बिजली कटौती शुरू हो गई है। उपभोक्ताओं को अधिक जरूरत के समय बिजली नहीं मिल पा रही है। खासकर दोपहर व शाम के वक्त बिजली की कटौती चल रही है, इससे उपभोक्ता परेशान हो गए हैं।
निर्धारित से कम मिल रही आपूर्ति
शासन की ओर से ग्रामीण से लेकर शहर तक विद्युत आपूर्ति के लिए घंटों का निर्धारण कई वर्ष पहले कर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों को 18, तहसील मुख्यालय को 20 व शहरी क्षेत्र को 24 घंटे बिजली आपूर्ति का निर्देश है। इसके सापेक्ष मौजूदा समय में ग्रामीण क्षेत्रों में 10 से 12 घंटे, तहसील मुख्यालयों को करीब 15 व जिला मुख्यालय को करीब 22-23 घंटे बिजली मिल पा रही है।