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प्रत्याशियों के चयन में पिछड़ी भाजपा

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सुल्तानपुर। जिले में पांचवें चरण में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अभी तक बसपा के अलावा प्रमुख राजनीतिक दल जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित नहीं कर सके हैं। प्रत्याशी चयन में भाजपा सबसे पीछे है। भाजपा ने अभी तक जिले की पांच में से चार सीटों पर प्रत्याशी नहीं घोषित किए हैं। एक-एक सीट पर कांग्रेस और सपा ने पत्ते नहीं खोले हैं। प्रत्याशी चयन को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।
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जिले में पांचवें चरण में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर मंगलवार से नामांकन शुरू हो जाएंगे। अभी तक जिले की पांच में से चार विधानसभा सीटों सुल्तानपुर, लंभुआ, सदर और इसौली पर भाजपा के प्रत्याशी घोषित नहीं हैं। एकमात्र कादीपुर सुरक्षित सीट पर ही भाजपा ने अपने प्रत्याशी की घोषणा की है। पिछले दिनों सपा ने लंभुआ, कादीपुर (सुरक्षित), सदर, सुल्तानपुर सीट पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए थे। इसौली सीट पर अभी तक उसका प्रत्याशी घोषित नहीं है। कांग्रेस कादीपुर (सुरक्षित), सदर, सुल्तानपुर और लंभुआ से अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है। इसौली में उसका प्रत्याशी घोषित नहीं हैं। वहीं, बसपा सभी पांच सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार चुकी है। दावेदारी के लिहाज से टिकट को लेकर सर्वाधिक मारामारी भाजपा में है।
चार सीटों पर उसके 30 से अधिक दावेदार हैं। इन चार में से तीन सीटों पर वर्तमान समय में उसके विधायक हैं। शायद यही वजह है कि भाजपा प्रत्याशी चयन में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। राजनीतिक नफा-नुकसान के साथ ही दावेदारों की नाराजगी के असर की भी थाह ली जा रही है। वहीं, एक सीट के गठबंधन के खाते में जाने की भी चर्चा आए दिन आम रहती है। इसौली जिले की एकमात्र विधानसभा सीट है, जिस पर सपा का विधायक है लेकिन प्रत्याशी चयन में सबसे बड़ा पेंच यही है। यहां दावेदारों की लंभी फेहरिस्त के अलावा सुल्तानपुर में टिकट से खारिज हुए लोग भी संभावनाएं तलाश रहे हैं। यहां से प्रत्याशी के नाम की घोषणा में विलंब को यही वजह माना जा रहा है। कांग्रेस में पार्टी के दावेदारों के अलावा अन्य दलों से खारिज होने वाले भी जोर लगाए हैं। इन सबके विपरीत जिले में अटकलों का बाजार गर्म है। कभी किसी के नाम की चर्चा तो कभी किसी को टिकट के लिए लखनऊ बुलाए जाने की अफवाहें आम हैं।
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