सुल्तानपुर। धान की कटाई के साथ पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। खेतों में फसल अवशेष जलाने पर किसानों से पांच हजार से 30 हजार रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। वहीं, बिना फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र के कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई करने पर मशीन पूरे सीजन के लिए सीज कर दी जाएगी।
उपकृषि निदेशक सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में अभी तक पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय उसे मिट्टी में मिलाकर सड़ाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रा रीपर, स्ट्रा रैक, बेलर या अन्य फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र का इस्तेमाल अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वाले हार्वेस्टर को पूरे कटाई सीजन के लिए सीज किया जाएगा।
पराली जलाने पर क्षेत्रफल के अनुसार जुर्माना
फसल अवशेष जलाने पर 0.81 हेक्टेयर से कम क्षेत्र के लिए पांच हजार रुपये, 0.81 से 2.02 हेक्टेयर तक 10 हजार रुपये और 2.02 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के लिए 30 हजार रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के प्रावधानों के तहत बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर कारावास की कार्रवाई भी हो सकती है। प्रशासन ने किसानों से पराली न जलाने और पर्यावरण के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति सुरक्षित रखने की अपील की है।