अमहट। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में अब इलाज की पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो गई है। बृहस्पतिवार से आधार कार्ड या आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) आईडी के जरिए ऑनलाइन पंजीकरण शुरू होने के साथ पहले ही दिन 1577 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ।
नई व्यवस्था से मरीजों का उपचार इतिहास एक क्लिक पर उपलब्ध होगा, जिससे डॉक्टर बेहतर और तेज इलाज दे सकेंगे। शुरुआती दिन में तकनीकी और जागरूकता की कमी के कारण कुछ मरीजों को पर्चा बनवाने में परेशानी भी उठानी पड़ी।
अमहट स्थित मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार से ओपीडी पर्चा व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल कर दी गई। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों का पंजीकरण आधार कार्ड या आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) आईडी के माध्यम से ऑनलाइन किया जा रहा है। ऑनलाइन पंजीकरण के बाद मरीज की जांच, दवा और उपचार का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल हेल्थ सिस्टम में सुरक्षित रहेगा। यदि मरीज पहले किसी अन्य सरकारी अस्पताल में इलाज करा चुका है तो डॉक्टर आभा आईडी के जरिए उसका चिकित्सा इतिहास भी देख सकेंगे। जिससे अनावश्यक जांच दोबारा कराने की जरूरत कम होगी और इलाज की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
परचा बनने में तीन मिनट का समय लग रहा
नई व्यवस्था के पहले दिन कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आईं। फिलहाल एक ऑनलाइन परचा बनाने में करीब तीन मिनट का समय लग रहा है। सोनबरसा से इलाज कराने आए सुरेश कुमार ने बताया कि उन्हें नई व्यवस्था की जानकारी नहीं थी। कुछ देर इंतजार के बाद उनका मैनुअल पर्चा बनाया गया, तब जाकर इलाज हो सका। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि शुरुआती दिनों में पंजीकरण में अधिक समय लग सकता है। आधार कार्ड या आभा आईडी साथ न होने तथा सर्वर या इंटरनेट में तकनीकी दिक्कत आने पर प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका भी रहेगी।
मैनुअल परर्चा भी बनेंगे
इन चुनौतियों से निपटने के लिए अस्पताल ने वैकल्पिक व्यवस्था भी की है। जिन मरीजों के पास आधार या आभा आईडी नहीं होगी, उनका इलाज नहीं रुकेगा और अस्थायी मैनुअल परचा बनाया जाएगा। मरीजों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त पंजीकरण काउंटर भी खोले जाएंगे। साथ ही अस्पताल परिसर में आभा आईडी बनाने और लोगों को नई व्यवस्था के प्रति जागरूक करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मरीज का इतिहार एक प्लेटफार्म पर होगा
सीएमएस डॉ. अविनाश चंद्र गुप्ता ने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण से मरीजों का पूरा उपचार इतिहास एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। इससे डॉक्टरों को सटीक इलाज देने में सुविधा होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी मरीज का इलाज प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा और जरूरत के अनुसार पंजीकरण काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।