सुल्तानपुर। करौंदीकला विकास खंड क्षेत्र की नरायनपुर नागनाथपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा के 4.52 लाख रुपये से व्यक्तिगत लाभ के लिए इंटरलॉकिंग कराने के आरोपी ग्राम प्रधान को अधिकारी बचाने में जुटे हैं। जांच में दोषी मिले तत्कालीन पंचायत सचिव, रोजगार सेवक व तकनीकी सहायक पर एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड की वसूली के लिए नोटिस जारी कर दिया गया, लेकिन प्रधान के गलत तरीके से धनराशि खर्च किए जाने के मामले को दबा दिया गया है।
ग्राम पंचायत में करीब 120 मीटर इंटरलॉकिंग मनरेगा से निजी हित में करा दी गई थी। गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद पांडेय की शिकायत पर लोकपाल महेंद्र विक्रम सिंह ने जांच की थी, जिसमें इंटरलॉकिंग कार्य गलत कराया जाना पाया गया था। लोकपाल की जांच में ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक व रोजगार सेवक दोषी पाए गए थे। इस पर लोकपाल ने कर्मचारियों पर एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाते हुए वसूली और गलत ढंग से कार्य कराने के मामले में दोषियों पर कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट डीसी मनरेगा व डीएम को भेजी थी।
संस्तुति मिलने पर डीसी मनरेगा ने रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक व पंचायत सचिव से अर्थदंड की वसूली के लिए नोटिस जारी कर दिया, लेकिन ग्राम प्रधान पर कार्रवाई व सरकारी धनराशि की वसूली के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
स्पष्ट नहीं है लोकपाल का आदेश
मनरेगा के उपायुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि मामले में लोकपाल की ओर से जारी आदेश में ये स्पष्ट नहीं है कि प्रधान से सरकारी धन की रिकवरी की जानी है या नहीं। इस संबंध में उनसे चर्चा करने के बाद कार्रवाई की जाएगी।