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अस्पतालों में सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी

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सुल्तानपुर। सर्द-गर्म मौसम बच्चों के साथ ही बुजुर्गों पर भारी पड़ रहा है। प्रतिरोधक क्षमता सामान्य दिनों से कम होने की वजह से बच्चे सर्दी, जुकाम और बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। मौजूदा समय में जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
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बृहस्पतिवार को ‘अमर उजाला’ ने जिला अस्पताल का जायजा लिया तो मरीजों की भीड़ देखने को मिली। ओपीडी में मरीज खचाखच भरे मिले। चिल्ड्रेन वार्ड में खांसी, बुखार और दस्त से पीड़ित बच्चे भर्ती मिले। यही हाल जनरल वार्ड और पेइंग वार्ड का भी रहा। भर्ती मरीजों में बुजुर्गों की संख्या भी अच्छी-खासी रही।
जिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को कुल 1895 मरीजों का पंजीयन किया गया। इनमें करीब पांच सौ बच्चे शामिल रहे। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में चिकित्सक की सलाह पर मरीज अपना ब्लड टेस्ट कराते दिखे। अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में गोसाईगंज थाना क्षेत्र के हयातनगर निवासी रामतीरथ की तीन वर्षीय बेटी तमन्ना को बुखार से पीड़ित होने पर भर्ती कराया गया था। छह माह की जुनैरा फातिमा पुत्री सद्दाम निवासी चुनहा कोतवाली नगर को दस्त की शिकायत पर परिवारीजन लेकर पहुंचे थे।
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महुअरिया निवासी श्रीराम (36) को पेट में दर्द होने पर भर्ती कराया गया है। शहर के एमजीएस चौराहा निवासी शहनाज (45) को भी इंफेक्शन की शिकायत पर भर्ती किया गया था। लोहरामऊ निवासी हौसिला (40), प्रतापगढ़ की रहने वाली शुभरातन देवी (65), अमेठी के जामों निवासी लवलेश देवी (45), अमहट की धनपती (85), इस्माइलपुर की रहने वाली वर्षा (21) और बिकना धम्मौर की मंजू देवी (35) को पेट दर्द व खांसी होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सर्द-गर्म मौसम में प्रतिरोधक क्षमता अन्य दिनों की अपेक्षा कम हो जाती है। ऐसे में किसी भी प्रकार के मौसम परिवर्तन का असर तुरंत बच्चों पर पड़ता है। सर्द-गर्म मौसम में आलस के कारण हाथ धोए बिना ही अक्सर लोग बच्चों को गोद में उठा लेते हैं। कीटाणु का ध्यान नहीं रखते। इस वजह से बच्चों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। अक्सर बच्चे कलम के कैप या नीचे गिरी हुई चीजों को मुंह में डाल लेते हैं, जिससे उन्हें पेट दर्द या दस्त की समस्या हो जाती है।
डॉ. सुधाकर सिंह ने बताया कि रोटा वायरल डायरिया में बच्चे को दस्त, उल्टी और बुखार एकसाथ होता है। बच्चे के शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है और बुखार के कारण वह सुस्त और चिड़चिड़ा हो जाता है। बच्चा कभी-कभी बहुत कमजोर भी हो जाता है। वहीं, एलर्जी और अस्थमा का असर इस तरह के मौसम में बढ़ जाता है। बच्चों को सांस संबंधी परेशानी भी होती है। बंद नाक और गले में जकड़न के साथ नाक और आंख से पानी भी गिरता रहता है।
तेज हवा और प्रदूषण से सांस लेने में दिक्कत आने लगती है। बच्चों की आंखों में इंफेक्शन होने लगता है। इसका कारण एलर्जी व हार्मोन में बदलाव के साथ ठंडी हवा भी है। डॉ. सुधाकर सिंह ने बताया कि बच्चों के नैपी के गीलेपन का ध्यान रखें। इसकी अनदेखी पर बच्चों को न केवल ठंड लग जाती है बल्कि उनके शरीर के आंतरिक हिस्से में सूजन और इंफेक्शन भी हो सकता है। कमरे का तापमान सामान्य होना चाहिए। धूल, धुएं और गंदगी से छोटे बच्चों को दूर रखें। मामूली ठंड को भी नजरंदाज न करें और बच्चे को हमेशा मोजे पहनाकर रखें।
सीएमओ डॉ. सीबीएन त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान समय में दिन का तापमान तेजी से बढ़ रहा है जबकि रात में सर्दी रहती है। पल-पल बदल रहे मौसम से लोगों की सेहत भी बिगड़ने लगी है। शहर के अस्पताल में खांसी और जुकाम के मरीजों की लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इंफेक्शन बढ़ रहा है। जिस कारण खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज सीएचसी में अधिक पहुंच रहे हैं। इस तरह के मौसम में अस्थमा के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अस्थमा के मरीज को अपनी दवा हमेशा अपने पास रखनी चाहिए।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीबी सिंह बताते हैं कि मौजूदा समय में शरीर से पसीना आना बंद हो जाता है। इससे त्वचा में खिंचाव होता है और त्वचा फटनी भी शुरू हो जाती है। सर्द-गर्म मौसम में त्वचा पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। इस मौसम में नहाते समय साबुन का इस्तेमाल भी देखकर करें। साथ ही मॉस्चराइजर का भी इस्तेमाल करना चाहिए।
डायटीशियन आस्था सिंह बताती हैं कि सर्द-गर्म मौसम में यदि आपके खानपान का चार्ट बिगड़ा तो आपकी सेहत भी बिगड़ जाएगी। इसके साथ ही आपके फिगर पर भी बुरा असर पड़ सकता है। सर्द-गर्म मौसम में रोजाना एक्सरसाइज की जरूरत होती है। पानी को उबालकर पीएं। इंफेक्शन वाले मरीज से दूर रहें।
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