बजट के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों को पर्याप्त बिजली देने की सूबे की सरकार की मंशा पूरी नहीं हो सकी। धनराशि नहीं मिलने से शासन से स्वीकृत ग्रामीण क्षेत्रों के नौ उपकेंद्रों का निर्माण अभी शुरू ही नहीं हो सका है। इन उपकेंद्रों का निर्माण चालू वित्तीय वर्ष में ही पूरा होना था। अभी तक टेंडर नहीं होने से अब सपा शासन में निर्माण कार्य पूरा होने पर संशय हो गया है।
16 से 20 घंटे बिजली आपूर्ति की सरकार ने की थी घोषणा
ग्रामीण क्षेत्र को 16 से 20 घंटे बिजली आपूर्ति देने की सरकार ने पिछले वर्ष ही घोषणा की थी। सरकार ने वर्ष 2016 तक 20 घंटे आपूर्ति देने का निर्देश भी पावर कॉर्पोरेशन को दे दिया था। अपनी घोषणा को अमल में लाने के लिए सूबे की सरकार ने आनन-फानन में ग्रामीण क्षेत्रों के नौ उपकेंद्रों को मंजूरी देते हुए उसका शिलान्यास भी करा दिया था। इसके बाद बजट का रोड़ा लग गया।
30 करोड़ खर्च आने का अनुमान
ग्रामीण क्षेत्र के नौ उपकेंद्रों की स्थापना पर करीब 30 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इसमें एक 10 एमवीए का आठ पांच एमवीए का उपकेंद्र बनाना है। सरकार के आदेश पर पावर कॉर्पोरेशन ने माननीयों से इनका शिलान्यास करवा दिया लेकिन बजट के अभाव में अभी तक टेंडर नहीं हो सका। इसकी वजह से कार्य लटक गया है।