सांप का रेस्क्यू करते नीरज मिश्र। स्रोत-स्वयं
धनपतगंज। सांप दिखते ही लोग अक्सर उसे मारने दौड़ पड़ते हैं, लेकिन गोविंदपुर निवासी नीरज मिश्र उन्हें जीवनदान देने में जुटे हैं। तीन वर्षों में 700 से अधिक सांपों का रेस्क्यू कर चुके नीरज लोगों को भी इनके संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उनका कहना है कि सांप चूहों की संख्या नियंत्रित कर पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
नीरज बताते हैं कि बचपन में सांपों को मारते देखकर उन्हें पीड़ा होती थी। इंटर तक पढ़ाई के बाद उन्होंने जौनपुर के स्नेक कैचर मुरली हौसिला से प्रशिक्षण लिया और जरूरी उपकरण जुटाकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। शुरुआत में माता-पिता और पत्नी रंजना उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे, लेकिन अब परिवार पूरा सहयोग करता है। खेती-किसानी के बाद मिलने वाले समय में वह सांपों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाते हैं। हाल ही में भवानीपुर गांव में रसेल वाइपर का रेस्क्यू करते समय सांप ने उन्हें काट लिया। इसके बावजूद उन्होंने पहले सांप को सुरक्षित डिब्बे में रखा और फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनपतगंज पहुंचकर एंटी-स्नेक वेनम का उपचार कराया।
वन विभाग भी लेता है मदद
नीरज वन विभाग और डायल 112 पुलिस की सूचना पर भी रेस्क्यू करते हैं। हाल ही में मखदूमपुर में वन विभाग की टीम के साथ करीब 45 किलोग्राम वजनी अजगर को पकड़ने में सहयोग किया। डिप्टी रेंजर बृजेश यादव ने बताया कि विषम परिस्थितियों में विभाग भी नीरज की मदद लेता है।
खुद पकड़ने का प्रयास न करें
नीरज ने अपील की कि सांप दिखने पर उससे दूरी बनाए रखें और वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें। सांप के काटने पर झाड़-फूंक के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचें।