मोतिगरपुर के पुरैना तालाब में काम करते मजदूर।
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सुल्तानपुर। मनरेगा में सरकारी मजदूरी व स्थानीय स्तर की मजदूरी में करीब डेढ़ से दो गुने का अंतर आ गया है। इसकी वजह से जॉब कार्डधारक मनरेगा कार्य से अपना मुंह मोड़ने लगे हैं। स्थिति यह है कि जिले में मनरेगा के सक्रिय करीब सवा दो लाख जॉब कार्डधारकों के सापेक्ष सिर्फ 48 हजार मजदूर ही कार्य कर रहे हैैं। मजदूरी का असर है कि मनरेगा में मजदूरों की संख्या बढ़ाने में अधिकारियों व कर्मचारियों के पसीने छूट जा रहे हैं।
मनरेगा के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस समय जॉब कार्डधारक को एक दिन की मजदूरी 213 रुपये ही अनुमन्य है। इसके सापेक्ष स्थानीय स्तर पर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक प्रतिदिन की मजदूरी के अलग-अलग रेट हैं। शहर में प्रतिदिन मजदूरी पांच सौ रुपये तो ग्रामीण क्षेत्रों में तीन सौ से चार सौ रुपये तक एक दिन की मजदूरी है। मजदूरी में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक डेढ़ से करीब ढाई गुने तक का अंतर आ जाने से मनरेेगा के कार्य पर संकट छाता जा रहा है।
स्थिति यह है कि विभिन्न विभागों व ग्राम पंचायतों से कराए जाने वाले मनरेगा कार्य के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को जॉब कार्डधारक नहीं मिल रहे हैं। मजूदरों की हालत यह है कि प्राइवेट कार्य मिलने पर जॉब कार्डधारक मनरेगा के कार्य पर नहीं जा रहे हैं। मनरेगा से जॉब कार्डधारकों के मुंह मोड़ने से अधिकारियों व कर्मचारियों के लाख प्रयास के बाद भी करीब सवा दो लाख सक्रिय जॉब कार्डधारकों में करीब 48 हजार ही मनरेेगा के कार्य में लगे हैं।
इसलिए जेसीबी से काम कराने के मामले आ रहे सामने
मनरेगा का कार्य जेसीबी से कराए जाने के प्रकरणों के पीछे भी बड़ी वजह मजदूरों का नहीं मिलना बताया जा रहा है। विभागीय लोगों के मुताबिक जॉब कार्डधारकों को अधिक से अधिक रोजगार देने के दबाव की वजह से विभिन्न विभागों व पंचायतों की ओर से कार्य में जेसीबी उतार दी जा रही है। जेसीबी से कार्य कराकर मजदूरों से सांठगांठ करके उनके नाम पर मनरेगा से मजदूरी का भुगतान कर दिया जा रहा है। इसमें जॉब कार्डधारकों को भी बिना काम किए कुछ हिस्सा दे दिया जा रहा है।
जॉब कार्डधारकों को दी जा रही निर्धारित मजदूरी
उपायुक्त मनरेगा अनवर शेख का कहना है कि सरकार की ओर से निर्धारित मजदूरी ही जॉब कार्डधारकों को दी जा सकती है। उन्होंने स्वीकार किया कि मजदूरी में अंतर का असर कार्य पर पड़ रहा है लेकिन कोशिश करके मजदूरों को लगाया जा रहा है।