सुल्तानपुर। जिले में लंपी का प्रकोप दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। करीब पखवाड़े भर में ही 116 गांवों में संक्रमण फैल चुका है। इसकी चपेट में अभी तक 220 पशु आ गए हैं। अन्य पशुओं के ग्रसित होने की आशंका बढ़ गई है। इसे लेकर पशुपालकों की चिंता बढ़ती जा रही है।
जिले में करीब एक माह पहले दस्तक देने वाली पशुओं को होने वाली बीमारी लंपी पखवाड़े भर से तेजी से फैल रही है। इसके फैलने के पीछे प्रभावित पशुओं से सामान्य पशुओं को अलग न रख पाने की वजह सामने आ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लंपी से प्रभावित पशुओं को पशुशाला से अलग न रखे जाने से बीमारी का संक्रमण अन्य पशुओं को भी चपेट में लेता जा रहा है। अभी तक 116 गांवों के 220 पशुओं के चपेट में आने से संक्रमण का खतरा और बढ़ता जा रहा है। इसका कोई सटीक इलाज न होने से पशुपालकों की चिंता बढ़ती जा रही है।
दुग्ध व्यवसाय प्रभावित
लंपी से दूध देने वाले पशु ही प्रभावित हो रहे हैं। इस वजह से पशुओं का दूध काफी कम हो गया है। प्रभावित कुछ पशुओं ने दूध देना ही बंद कर दिया है। इससे पशुपालकों का दुग्ध व्यवसाय प्रभावित हो गया है। इससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।
बीते वर्ष कोई पशु नहीं हुआ था संक्रमित
प्रदेश के कई जिलों में पिछले वर्ष भी लंपी का प्रकोप था। इसे देखते हुए शासन के निर्देश पर पशु बाजार बंद करा दिए गए थे। कई जिलों में फैलाव के बावजूद सुल्तानपुर लंपी के प्रभाव से बच गया था। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में पिछले वर्ष कोई पशु लंपी से ग्रस्त नहीं पाया गया था।
काफी कमजोर हो जाते हैं मवेशी
प्रभारी पशु मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शिवशंकर यादव ने बताया कि इसमें तेज बुखार के साथ ही चेचक जैसे दाने पशुओं के शरीर में निकल आते हैं। संक्रमण का प्रभाव कई दिनों तक बना रहता है। इसकी वजह से पशु काफी कमजोर हो जाते हैं।
एक लाख नौ सौ पशुओं का टीकाकरण
पशुओं को लंपी से बचाने के लिए टीकाकरण करवाया जा रहा है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अभी तक एक लाख नौ सौ पशुओं का टीकाकरण कराया जा चुका है। अभी टीकाकरण का काम चल रहा है।
संक्रमित पशुओं की सूचना देने के लिए नंबर जारी
पशुपालन विभाग ने संक्रमित पशुओं की सूचना देने के लिए विभाग के कर्मचारियों को लगाया है। इसके लिए फोन नंबर 9696209427, 05362-241047 व 9450613189 जारी किए गए हैं। पीड़ित लोग इन नंबरों पर सूचना दे सकते हैं।
संक्रमण से बचाने के उपाय
ग्रामीण पशुओं को लंपी से बचाने के लिए घर पर आसानी से उपलब्ध होने वाले नारियल तेल व पिसी हल्दी को मिलाकर उनके शरीर पर लेप लगाएं। रक्त आश्रित कीट के काटने से बचाने के लिए कीट निवारक अन्य दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं। पशुशाला व अन्य पशुओं के स्थल पर फिनोल का छिड़काव करें। प्रभारी सीवीओ डॉ. शिवशंकर यादव ने बताया कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इसमें पशुओं की मृत्युदर एक फीसदी से भी नीचे है।