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आंखें गंवाने वालों को मुआवजे की उम्मीद

Wed, 14 Oct 2015 10:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
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करीब 10 वर्ष पूर्व कादीपुर सीएचसी में आयोजित जिला अंधता निवारण नि:शुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन और लेंस प्रत्यारोपण शिविर में चिकित्सकों की लापरवाही से छिनी 10 लोगों की आंख की रोशनी के मामले में पीड़ितों में नई उम्मीद जगी है। पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए राज्य मानवाधिकार आयोग की सिफारिश के बाद कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए पीड़ितों में खुशी है। अमर उजाला ने बुधवार को पीड़ितों से बातचीत की।
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18 नवंबर 2005 से दिसंबर 2005 तक कादीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन एवं लेंस प्रत्यारोपण शिविर का आयोजन जिला अंधता निवारण समिति की ओर से किया गया था। डॉक्टरों एवं अन्य कर्मियों की लापरवाही से राम लखन वर्मा, वासुदेव वर्मा, सहाबुद्दीन, रम्मू, बंसू मौर्य, शोभावती, सिरताजी, इंद्रावती, नौरंगी और केवला देवी के आंखों की रोशनी चली गई थी। आरटीआई एक्टीविस्ट डॉ. राकेश सिंह ने 2009 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जनहित याचिका दायर की थी।

चार मार्च 2014 को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य मानवाधिकार आयोग मौके पर जाकर जांच करें और यह तय करें कि किस पीड़ित को कितना मुआवजा दिया जाए। कोर्ट के आदेश पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने कादीपुर क्षेत्र के दौरा कर बीते दिनों सीएचसी प्रभारी कादीपुर डॉ. डीके सिंह, तत्कालीन नेत्र सहायक बद्री नारायण और याचिका कर्ता डॉ. राकेश सिंह से मुलाकात कर उनका पक्ष लिया था। बीते 11 अक्तूबर को कोर्ट में श राज्य मानवाधिकार आयोग की सिफरिश पर न्यायमूर्ति राकेश तिवारी और न्यायमूर्ति प्रत्यूष कुमार की खंडपीठ ने राज्य सरकार पेसे पीड़ित लोगों तीन लाख रुपये तक मुआवजा दिलाए जाने कहा है।
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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने रिपोर्ट की एक कॉपी सरकारी वकील को दिए जाने के निर्देश देकर सरकार से इस पर 10 दिन में अपना रुख साफ करने को कहा है। बुधवार को अमर उजाला टीम ने बुधवार को सूरापुर की रहने वाली शोभावती, बंशू मौर्य, केवला देवी, टीपी नगर निवासी सिरताजी और खेतापुर निवासी राम लखन से मुलाकात की। कैंप में इन लोगों की एक आंख की रोशनी चली गई थी। पीड़ितों ने बताया कि देर से ही भले लेकिन कोर्ट का फैसला सही आया। उधर पीड़ितों के हक के लिए लड़ाई लड़ रहे डॉ. राकेश सिंह भी राज्य मानवाधिकार आयोग के सिफारिश पर संतोष जताया।
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