सुल्तानपुर। 23 वर्ष पूर्व छप्पर रखने को लेकर हुए विवाद में दलित की हत्या करने के मामले में मंगलवार को स्पेशल जज एससी/एसटी एक्ट/एडीजे द्वितीय राकेश कुमार यादव ने पिता-पुत्र समेत तीन अभियुक्तों को उम्रकैद व 12-12 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। एक अभियुक्त की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।
गोसाईगंज थाने के ग्राम मुसरा मौजा रंडौली निवासी दलित छट्ठू के रखे छप्पर को गांव के ही आरोपी 18 जून 1998 को उठा ले गए थे। दलित छट्ठू जब अपना छप्पर मांगने आरोपियों के पास गया तो उसे लाठी, डंडे से मारकर घायल कर दिया गया था।
बीच बचाव करने पर आरोपियों ने छट्ठू के भतीजे वंशू, सीताराम व नन्हकऊ को भी मारपीट कर चोटें पहुंचाई थी। गंभीर हालत में छट्ठू को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 25 अगस्त 1998 को उसकी मौत हो गई थी।
मामले में मृतक के भतीजे वंशू की तहरीर पर आरोपी देव नरायन उपाध्याय, उसके पुत्र रमाशंकर और आरोपी लालजी उपाध्याय व उसके पुत्र संतोष के खिलाफ गैर इरादतन हत्या व दलित उत्पीड़न का केस दर्ज किया गया था।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ और बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सोमवार को स्पेशल जज एससी/एसटी एक्ट/एडीजे द्वितीय राकेश कुमार यादव ने आरोपी देव नरायन उसके पुत्र रमाशंकर और आरोपी संतोष को दोषी करार दिया था।
मंगलवार को कोर्ट ने सजा के बिंदु पर सरकारी वकील गोरखनाथ शुक्ल व बचाव पक्ष की दलील सुनी। अदालत ने आरोपी देव नरायन उसके पुत्र रमाशंकर और आरोपी संतोष को उम्रकैद व 12-12 हजार रुपये की सजा सुनाकर जेल भेजने का आदेश दिया।
जुर्माना की 50 प्रतिशत राशि मृतक छट्ठू के पुत्र सीताराम को दी जाएगी। अभियुक्त लालजी की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।
दो अभियुक्तों का ट्रायल विचाराधीन
दलित छट्ठू की हत्या के मामले में अभियुक्त देवेेंद्र व श्रीनरायन के मुकदमे का ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है। उन्हें अभियोजन पक्ष की अर्जी पर 10 अगस्त 2011 को विचारण के लिए तलब किया था।