सुल्तानपुर। शारदीय उत्सवों के करीब आते ही जिले में गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। कोलकाता से आए मूर्तिकारों ने देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। शहर के एमजीएस चौराहे के पास सुबह से देर शाम तक मिट्टी, पुआल और बांस के सहारे आस्था को आकार दिया जा रहा है।
फिलहाल अभी गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं, इसके बाद दुर्गा प्रतिमाएं बनाई जाएंगी। पूजा समितियों से प्रतिमाओं के लिए ऑर्डर मिलने लगे हैं। मूर्तिकार रवीन पाल अपने 11 साथियों के साथ 7 जून को कोलकाता से सुल्तानपुर पहुंचे थे। पिछले तीन वर्षों से उनके पिता आरके पाल अस्वस्थ हैं, इसलिए रवीन प्रतिमा निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस बार उन्हें 22 गणेश प्रतिमाओं और 35 दुर्गा प्रतिमाओं के ऑर्डर मिल चुके हैं। टीम का हर सदस्य मिट्टी तैयार करने या बांस-पुआल से ढांचा खड़ा करने जैसी अलग-अलग जिम्मेदारी निभा रहा है। दीपावली के बाद सभी मूर्तिकार कोलकाता लौटेंगे।
प्रतिमा निर्माण की सामग्री महंगी हुई
प्रतिमा निर्माण में पुआल, काली व पीली मिट्टी, बांस, लकड़ी, सुतली, धान की भूसी, लकड़ी का बुरादा, जूट और सूती कपड़े का उपयोग होता है। रवीन पाल ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अधिकांश सामग्रियों की कीमत डेढ़ से दोगुनी तक बढ़ गई है। नवरात्र नजदीक आते ही कोलकाता से चार से छह और कारीगर बुलाए जाएंगे।
पांच जिलों तक जाती हैं प्रतिमाएं
सुल्तानपुर में तैयार होने वाली प्रतिमाओं की मांग सिर्फ जिले तक सीमित नहीं है। यहां से अयोध्या, अंबेडकरनगर, अमेठी, प्रतापगढ़ और जौनपुर की पूजा समितियां भी प्रतिमाएं ले जाती हैं। इसी वजह से मूर्तिकारों को अभी से बड़ी संख्या में ऑर्डर मिलने लगे हैं।