लखनऊ/सुल्तानपुर। दिल्ली केसीएम और आम आदमी पार्टी (आप) केनेता अरविंद केजरीवाल को अमेठी में कथित ‘उत्तेजक स्पीच’ देने केमामले में हाईकोर्ट से राहत मिल गई। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अमेठी की एक अदालत से मामले में उनके खिलाफ जारी जमानती वारंट पर चार हफ्ते केलिए रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि अगर केजरीवाल की तरफ से अमेठी केन्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में उनकी निजी हाजिरी माफी की अर्जी दी जाए तो निचली अदालत उस पर कानून केमुताबिक गौर करेगी।
न्यायमूर्ति महेन्द्र दयाल ने सोमवार को यह फैसला व आदेश अरविंद केजरीवाल की तरफ से दायर याचिका का निपटारा करते हुए दिया। इसमें पिछले साल लोकसभा चुनाव केदौरान अमेठी में एक सभा में केजरीवाल द्वारा दिए गए कथित भड़काऊ भाषण देने केसिलसिले में दर्ज मामले की पूरी कार्यवाही रद्द किए जाने की गुजारिश की गई थी। बीती 20 जुलाई को अमेठी केन्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने केजरीवाल की पेशी केलिए उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था। इसमें, मामले में दाखिल किए गए आरोप पत्र, जारी जमानती वारंट समेत परी कार्यवाही को निरस्त किए जाने का आग्रह किया गया था।
कोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए यह भी कहा कि केजरीवाल द्वारा इस याचिका में लिए गए आधार समुचित स्टेज पर निचली अदालत के समक्ष लिए जा सकते हैं और निचली अदालत इन पर समुचित आदेश पारित कर सकेगी।
याची केअधिवक्ता महमूद आलम की दलील थी कि केजरीवाल द्वारा दिया गया कथित वक्तव्य ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केहक केदायरे में आता है ऐसे में उनकेखिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। इसका विरोध कर शासकीय अधिवक्ता रिशाद मुर्तजा का कहना था कि अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार संविधान केदायर में है और इसकी अपनी सीमाएं हैं, ऐसे में याची के खिलाफ उत्तेजक भाषण देने (धारा 125 जन प्रतिनिधित्व कानून 1951) का मामला बनता है।’