सुल्तानपुर। जामिया इस्लामिया में चल रहे जलसा शोहदा-ए-इस्लाम के आठवें दिन बुधवार रात औलाद-ए-नबी और इस्लामी समाज में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि मुसलमानों के लिए अहल-ए-बैत के बारे में सही और प्रामाणिक जानकारी हासिल करना बेहद जरूरी है।
नमाज-ए-इशा के बाद आयोजित जलसा का आगाज कुरआन की तिलावत से हुआ। नात व मनकबत भी पेश की गई। मुख्य वक्ता मौलाना मोहम्मद कसीम कासमी ने बताया कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की चार पुत्रियां और तीन पुत्र थे। उन्होंने उनकी जिंदगी, विशेषताओं और इस्लाम के लिए किए गए योगदान पर प्रकाश डाला। मौलाना मुतहर कासमी ने कहा कि शोहदा-ए-इस्लाम के ये जलसे दीन की सही समझ पैदा करने का माध्यम है। मुहर्रम महीने का उल्लेख कुरआन मजीद में विशेष महत्व के साथ किया गया है। अंत में दुआ के साथ जलसे का समापन हुआ। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।