सुल्तानपुर। वर्षों से चले आ रहे दुर्गापूजा महोत्सव को भले वह भव्यता न मिल पाए लेकिन आयोजन का तारतम्य नहीं टूटेगा। शासन की ओर से जारी नई गाइडलाइन के बाद दुर्गापूजा पंडालों की अनुमति मिलने के आसार बढ़ गए हैं। इससे पूजा समितियों में हर्ष का माहौल है।
जिले का ऐतिहासिक दुर्गापूजा महोत्सव विजयादशमी के दिन से शुरू होता है, जो अगले पांच दिनों तक चलता है। इन पांच दिनों में लाखों की संख्या में जिले के अलावा गैर जनपदों से भी पंडाल व गुफाओं में सजने वाली दुर्गा प्रतिमाओं के दर्शन करने आते हैं।
शाम छह बजे से शहर में मेलार्थियों की भीड़ जुटने लगती है, जो भोर तक जारी रहती है। वैश्विक महामारी कोविड-19 व शासन की मनाही की वजह से सभी पूजा समितियों में उहापोह की स्थिति बनी थी। अब शासन की नई गाइडलाइन में दुर्गापूजा महोत्सव के आयोजन आसार बढ़ गए हैं। इसे लेकर पूजा समितियां भी सक्रिय हो गई हैं।
हालांकि पूर्व में करीब दो माह पहले से ही कोलकाता से आने वाले मूर्तिकार देवी प्रतिमाओं की तैयारी में जुट जाते थे। इस बार अभी तक जिले में कहीं भी बड़ी प्रतिमाएं नहीं बन रही हैं। साथ ही पंडाल के सजावट का भी काम शुरू नहीं हुआ है।
दुर्गापूजा समितियों से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार ने निर्धारित गाइडलाइन व शर्तों के साथ दुर्गापूजा महोत्सव मनाने की स्वीकृति दे दी है लेकिन प्रशासन की ओर से तैयारियां नहीं हैं। दुर्गापूजा महोत्सव शुरू होने में अभी पखवारे भर से अधिक का समय बचा है।
अभी तक जिला प्रशासन नेे पूजा समितियों के साथ एक भी बैठक नहीं की है। विभिन्न विभागों की ओर से होने वाली दुर्गापूजा की तैयारियां भी शून्य हैं। ऐसे में दुर्गापूजा महोत्सव में पहले जैसी भव्यता की संभावना नहीं है।
शहर से सटे अमहट चौराहे के निकट स्थित संकट हरणी माता पूजा समिति के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद अग्रहरि ने बताया कि कोरोना की वजह से इस बार कोलकाता के मूर्तिकार नहीं आए हैं। इससे देवी प्रतिमा के मिलने की समस्या बनी हुई है।
यदि मूर्ति मिल भी जाती है तो छोटा पंडाल सजाकर देवी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। शासन के निर्देशानुसार बिना ध्वनि विस्तारक के मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करेंगे। साथ ही समिति का यह प्रयास होगा कि पांडाल पर दर्शनार्थियों की भीड़ न होने पाए।