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Sultanpur News: खाकी की बर्बरता पर हाईकोर्ट सख्त, एसपी सुल्तानपुर तलब

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जयसिंहपुर/लखनऊ। मोतिगरपुर थाना क्षेत्र में पुलिसिया उत्पीड़न का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि बीती 6 सितंबर की रात थाना क्षेत्र के बढ़ौनाडीह निवासी श्याम सुंदर अग्रहरि के घर में कुछ पुलिसकर्मी जबरन घुस आए और परिजनों से मारपीट कर उन्हें थाने ले गए। बाद में पीड़ितों को ही अभियुक्त बनाकर जेल भेज दिया गया। इस घटना ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
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मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पहुंचा, जहां न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने इसे गंभीर मानते हुए सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह और मोतिगरपुर थानाध्यक्ष विजय कुमार सिंह को 19 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था।
इस आदेश के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई। सुनवाई से पूर्व ही एसपी ने मोतिगरपुर एसओ विजय कुमार सिंह को निलंबित कर दिया, चार सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया गया और सीओ जयसिंहपुर आशुतोष सिंह का तबादला कर दिया गया।
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इसके बावजूद 15 अक्टूबर को हुई सुनवाई में अदालत पुलिस के जवाब से असंतुष्ट रही और आदेश दिया कि पूर्व सीओ आशुतोष सिंह को भी पार्टी बनाते हुए एसपी सुल्तानपुर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा।
इसी बीच, न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति बबिता रानी की खंडपीठ ने श्याम सुंदर अग्रहरी बनाम राज्य सरकार याचिका की सुनवाई में राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। अदालत को बताया गया कि प्रारंभिक जांच में कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है और कुछ का तबादला हुआ है, जबकि आगे की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पूरी कार्रवाई पूर्वाग्रह से ग्रस्त थी और उन्हें बेवजह प्रताड़ित किया गया। अदालत की सख्ती के बाद अब क्षेत्रवासियों में न्याय की उम्मीद जगी है, जबकि पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। इस संबंध में एसपी कुंवर अनुपम सिंह ने बताया कि कोर्ट का जो आदेश होगा,उसका अनुपालन किया जाएगा।
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