सुल्तानपुर। जिले में पर्याप्त मात्रा में डीएपी होने के बाद भी किसानों को खाद के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। समितियों पर डीएपी के लिए सुबह से किसानों को भूखे-प्यासे रहकर लाइन लगानी पड़ रही है। कई घंटे इंतजार करने के बाद उन्हें एक बोरी डीएपी काफी मशक्कत करने के बाद मिल पा रही है। खाद नहीं मिलने से खेतों में बोआई का कार्य भी पिछड़ता जा रहा है।
कृषि विभाग के मुताबिक जिले में 2625 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। कई समितियों पर खाद भेजी भी गई है। जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी बताते हैं कि इस समय आलू, मटर, चना, सरसों आदि की बोआई चल रही है। गेहूं की बोआई का सही समय 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच होता है। अधिकांश किसान समितियों से एडवांस में डीएपी की खरीद कर ले रहे हैं। इसकी वजह से कुछ जगहों पर खाद की कमी पड़ जा रही है।
हालांकि, समितियों पर एनपीके, नैनो डीएपी समेत अन्य प्रकार की कई उर्वरक मौजूद हैं। जागरूकता की कमी के चलते किसान सिर्फ डीएपी की ही खरीदारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डीएपी की रैक आने पर समितियों को भेजी जाएगी। अभी गेहूं की बोआई में काफी समय है।
तीन घंटे में 200 बोरी बिक गई डीएपी
मोतिगरपुर। धान की कटाई शुरू होने के बाद आलू, सरसों, चना के साथ गेहूं की बोआई के लिए डीएपी की मांग बढ़ गई है। मोतिगरपुर में स्थित साधन सहकारी समिति लिमिटेड (बी पैक्स) दियरा और मैरी संग्राम समिति का संचालन होता है। मैरी संग्राम समिति पर 200 बोरी डीएपी की खेप रविवार को आई थी। सोमवार सुबह सात बजे से ही खाद लेने आए किसान कतार में लग गए। सुबह 9:30 बजे से सचिव ने डीएपी का वितरण शुरू किया।
दोपहर साढ़े 12 बजे तक खाद समाप्त हो गई। प्रति बोरी 1,350 रुपये की दर से प्रत्येक किसान को एक या दो बोरी से अधिक नहीं दिया गया। करीब 140 किसानों को डीएपी खाद वितरित की गई। समिति के सचिव श्याम बिहारी पांडेय ने बताया कि किसानों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के प्रति रुझान कम है। शेष किसानों को खाद उपलब्ध होने पर वितरण किया जाएगा।
किसानों में मारामारी, एक का सिर फूटा
दोस्तपुर (सुल्तानपुर)। सहकारी संघ दोस्तपुर में सोमवार की सुबह जैसे ही किसानों को डीएपी खाद मिलने की जानकारी हुई तो भीड़ लगने लगी। किसान पर्ची के लिए एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने लगे। इसी दौरान क्षेत्र के खालिसपुर डींगुर बभनगवां व नारामधईपुर गांव के किसानों में कहासुनी होने लगी। विवाद बढ़ा तो दोनों गांवों के किसान आपस में भिड़ गए मारपीट में नारामधईपुर निवासी भुल्लुर यादव का सिर फट गया।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया। इसके बाद किसानों को खाद का वितरण किया गया। हालांकि, मारपीट में दोनों गांवों के किसानों में किसी ने भी थाने मेें तहरीर नहीं दी है। सचिव शैलेश पांडेय ने बताया कि गोदाम के लिए रास्ता नहीं होने के कारण ट्रक 20 मीटर दूर सड़क पर खड़ी कर उतारना पड़ता है। इससे किसानों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
डीएपी की किल्लत से किसान परेशान
सेमरी बाजार। जयसिंहपुर के साधन सहकारी समिति महमूदपुर सेमरी, कल्याणपुर, बिरसिंहपुर व भीखुपुर पर डीएपी खाद नदारद है। प्रतिदिन किसान खाद गोदाम का चक्कर लगाते हैं।किसान बद्री विशाल, उदयभान सिंह, अखिलेश सिंह, राज बहादुर यादव आदि ने बताया कि यदि समय से डीएपी खाद नहीं मिली तो खेत से नमी चली जाएगी। इससे आलू, सरसों, मटर, चना, मसूर की बोआई काफी पिछड़ जाएगी। इससे फसल के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
निजी दुकानदारों का ले रहे सहारा
कुड़वार। पूरे तिलक गांव निवासी किसान शिवमूर्ति तिवारी ने कहा कि बोआई के समय डीएपी और सिंचाई के बाद यूरिया बाजार से गायब रहती है। केवटली निवासी रामधीरज दुबे कहते हैं कि डीएपी नहीं मिलने से रबी की फसलों आलू, मटर, सरसों, मसूर आदि की बोआई में देरी हो रही है। मंगापुर निवासी राजकुमार सिंह ने बताया कि किसानों को मौसम, महंगाई व छुट्टा जानवरों की मार झेलनी पड़ रही है। डीएपी नहीं मिलने से निजी दुकानदारों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। बचनपुर निवासी राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि समितियों पर डीएपी नहीं मिलने से प्राइवेट दुकानदारों की पौ बारह है। घटिया किस्म के एनपीके रासायनिक उर्वरकों को निजी दुकानदार 13 सौ रुपये में बेच रहे हैं।