सुल्तानपुर। जिले की इकलौती किसान सहकारी चीनी मिल को मंगलवार देर शाम केन कमिश्नर के आदेश पर बंद कर दिया गया। इससे मिल परिसर में गन्ना लेकर पहुंचे किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। किसानों ने गन्ने की तौल कराने से इन्कार कर दिया। बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया। इसमें राजनीतिक दल और किसान संगठन भी शामिल हो गए। ऐसे में प्रदर्शनकारियों को समझाने में अधिकारियों के पसीने छूट गए।
मंगलवार देर शाम केन कमिश्नर मिनिस्ती एस. ने किसान सहकारी चीनी मिल को बंद करने का आदेश जारी कर दिया। बुधवार सुबह नौ बजते-बजते आक्रोशित किसान चीनी मिल पहुंच गए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। कुछ ही देर में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी में चीनी मिल पहुंच गए।
भाकियू के प्रदेश सचिव अजय सिंह टुनटुन ने कहा कि जिले की इकलौती चीनी मिल को बंद नहीं किया जाना चाहिए। चीनी मिल के बंद होने से गन्ना किसान तबाह हो जाएंगे। किसान हैदरगढ़ चीनी मिल को गन्ना नहीं बेचेंगे। जिलाध्यक्ष रामविशाल मौर्य ने कहा कि चीनी मिल बचाने की लड़ाई जारी रहेगी।
इस दौरान किसान संगठनों ने तहसीलदार को ज्ञापन दिया। सपा के पूर्व विधायक अरुण वर्मा ने भी किसानों की मांगों को जायज बताया। किसानों के समर्थन में सदर विधायक राज प्रसाद चीनी मिल पहुंचे और आश्वासन दिया कि चीनी मिल का संचालन कराने का प्रयास करेंगे।
सुल्तानपुर चीनी मिल में होगी सिर्फ तौल
केन कमिश्नर के आदेश पर चीनी मिल में पेराई रोक दी गई है। फिलहाल गन्ना किसानों की समस्या को देखते हुए सुल्तानपुर सहकारी चीनी मिल में गन्ना तौल की व्यवस्था कराई गई है। ऑटोमेटिक धर्मकांटा हैदरगढ़ से मंगाया गया है।
- अंजली गंगवार, जीएम, किसान सहकारी चीनी मिल
नहीं मिली फूटी कौड़ी, अब 12 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान भुगतेंगे किसान
-चीनी मिल पर किसानों का 18.48 करोड़ का बकाया, पैसा फंसने का सता रहा डर
-जिले के 6500 गन्ना किसान हलकान, चीनी मिल बंद होने के बाद जागे जनप्रतिनिधि
संवाद न्यूज एजेंसी
सुल्तानपुर। गन्ना भुगतान के लिए दो महीने से भटक रहे किसानों को आखिरकार निराशा हाथ लगी। मंगलवार शाम को चीनी मिल में पेराई बंद करने के साथ ही 6150 गन्ना किसानों को अब भुगतान फंसने का डर सताने लगा है। हैदरगढ़ चीनी मिल से संबद्ध होने के कारण किसानों को भाड़ा खर्च के नाम पर 12 रुपये प्रति कुंतल का नुकसान भी उठाना पड़ेगा।
चीनी मिल बंद होने के बाद जागे जनप्रतिनिधियों ने बुधवार को सीएम को पत्र लिखकर कोरम पूरा कर दिया है। सुल्तानपुर विधायक ने डीएम को पत्र लिखकर एक हफ्ते और मिल चलाने का अनुरोध किया है। वहीं, किसानों के धरने की जानकारी पर सदर विधायक राज प्रसाद उपाध्याय चीनी मिल तक पहुंचे और आश्वासन की घुट्टी पिलाकर चलते बने। किसानों के विरोध का असर इतना जरूर हुआ कि हैदरगढ़ चीनी मिल प्रशासन ने मिल परिसर में ही गन्ना तौल कराने की हामी भर दी है।
किसान सहकारी चीनी मिल में आठ दिसंबर को पेराई सत्र का शुभारंभ किया गया था। मिल के आंकड़ों के मुताबिक 6, 400 गन्ना किसान पंजीकृत हैं। गन्ना खरीद का लक्ष्य आठ लाख है। इसमें से सिर्फ 4.62 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद 6150 किसानों से हुई है। लगभग 250 किसानों का गन्ना अभी खेतों में ही लगा है। चीनी मिल पर गन्ने का करीब 18.48 करोड़ रुपये बकाया है। मिल बंद होने से 350 कर्मचारी भी प्रभावित होंगे।
55 दिन में 96 घंटे बंद रही चीनी मिल
वर्ष 1984 में स्थापित किसान सहकारी चीनी मिल अब जर्जर हो गई है। लगातार यांत्रिक खराबी होने से पेराई प्रभावित होने लगी। इस कारण चीनी का परता गिरने लगा। इस बार 55 दिन में चीनी मिल 96 घंटे बंद रही। चीनी का परता 6.80 फीसदी पर ही सिमटा रहा। ऐसे में अधिकारियों ने मिल के घाटे को देखते हुए बंद करना ही मुनासिब समझा।