दीपावली से लगातार बैंकों के बंद रहने से व्यवस्था चरमरा गई है। चार दिनों में करीब दो सौ करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ है। विभिन्न बैंकों के एटीएम खाली हो गए हैं। बीओबी के एटीएम में बीच-बीच में पैसा डाले जाने से उन पर मारामारी मची है। त्यौहारों के बीच लगातार बैंकों के बंद रहने से जनजीवन पर इसका असर पड़ा है।
दीपावली से लगातार तीन दिन के त्यौहार व माह के दूसरे शनिवार व रविवार की वजह से लगातार पांच दिन बैंक बंद रहे। बैंकों में लगातार छुट्टी से तीसरे व चौथे दिन से व्यवस्था चरमरा गई। लगातार बंदी से बाजारों में जरूरी सामानों का टोटा पड़ गया है। बैंकों में लेन-देन नहीं होने से व्यवसायी सामानों को नहीं मंगवा पा रहे हैं।
जिले में 27 बैंकों की शाखाएं हैं। बैंक सूत्रों के मुताबिक सभी बैंकों की शाखाओं को मिलाकर रोजाना करीब 50 करोड़ रुपये का टर्नओवर होता है। अनुमानित तौर पर चार दिनों की बंदी से करीब दो सौ करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ है।
शहर में बीओबी के कुछ एटीएम में बैंक द्वारा बीच-बीच में पैसा डालने से भीड़ टूट पड़ रही है। बीओबी के बस स्टेशन, विकास भवन स्थित एटीएम पर घंटों ग्राहकों की लंबी कतारें लगी रहीं। शाम होते-होते एटीएम फिर खाली हो गए। पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, एसबीआई के एटीएम से पैसा नहीं निकलने से लोग निराश होकर लौट रहे हैं।
शहर के रेमंड शोरूम के व्यवसायी अमित त्रिपाठी ने बताया कि चार दिनों में व्यवसाय पर बड़ा फर्क पड़ा है। नकद पैसा देकर कपड़ा खरीदने वाले ग्राहक नहीं आ रहे हैं। अब सिर्फ एटीएम व डेबिट कार्ड वाले ग्राहक ही आ रहे हैं। इसकी वजह से नकद धनराशि नहीं आ रही है।
इलेक्ट्रॉनिक्स व इलेक्ट्रिकल्स के व्यवसायी राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि दीपावली तक तो ग्राहक आए, लेकिन इसके बाद ग्राहकों का आना कम हो गया है। ट्रैक्टर व कार व्यवसायी सरदार बल्देव सिंह, किराना व्यवसायी शंकरलाल कैलाशी ने भी बिक्री प्रभावित होने की बात कही है।
नेशनल फेडरेशन आरबी इंप्लाइज यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव शिवकरन द्विवेदी का कहना है कि सरकार को पांच दिन की छुट्टी में संशोधन करना चाहिए था। शनिवार की छुट्टी को बाद में मर्ज करना चाहिए था। इसका असर विकास पर पड़ता है। बैंक यूनियन के पदाधिकारी सुनील मिश्रा ने भी पांच दिन की बंदी को गलत बताया।