सुल्तानपुर। बारिश में घरों में नमी ने अस्थमा मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना सांस की समस्या वाले रोजाना 50 से 70 मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में अस्थमा और सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) मरीजों को दिक्कतें बढ़ गई हैं। चिकित्सक विशेष सतर्कता की सलाह दी जा रही है।
खांसी और जकड़न जैसी समस्या से परेशान मरीज को आईसीयू में भर्ती करना पड़ रहा है। मेडिसिन विभाग की ओपीडी में 250 से अधिक मरीज आ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को मेडिसिन विभाग में मरीजों की लंबी कतार रही। फिजीशियन डॉ. एसी गुप्ता का कहना है कि 150 मरीजों को परामर्श दिया गया, जिसमें से 50 में अस्थमा और सीने से जुड़ी तकलीफ की शिकायत मिली। चेस्ट फिजीशियन डॉ. आर धीरेंद्र ने बताया कि गर्मी व नमी से सांस लेने में दिक्कत, छाती में भारीपन, खांसी और जकड़न जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं।
कुछ मरीजों को गले में खराश, सिर दर्द, थकावट और कमजोरी की भी शिकायत मिल रही है। बताया कि उमस से पसीना ज्यादा आता है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे मौसम में खुद को हाइड्रेट रखना और बाहर की धूल-धूप से बचना अस्थमा मरीजों के लिए बेहद जरूरी है।
सीओपीडी के मुख्य लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, खासकर शारीरिक गतिविधि के दौरान, खांसी (जिसमें बलगम भी हो सकता है), घरघराहट और सीने में जकड़न शामिल हैं। मरीजों को बचाव के साथ जरूरी दवाएं दी जा रही हैं। गंभीर लक्षण मिलने पर आईसीयू में भर्ती किया जा रहा है।
डॉक्टरों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
अधिक से अधिक पानी पीएं।
अनावश्यक बाहर न निकलें, बाहर जाएं तो मास्क लगाएं।
घर में रहें और अत्यधिक ठंडी हवा से बचें।
आहार में ताजे फल, सब्जियां, नट्स और सीड्स शामिल करें।