सुल्तानपुर। भाई मेरी हत्या हो जाएगी, मुझे फंसाने की साजिश रची जा रही है मुझे बचा लो। ये आखिरी कॉल दिल्ली में रहने वाले बड़े भाई ने करीब माह भर पहले गांव में रहने वाले अपने छोटे भाई से फोन पर कही थी। इस कॉल के ठीक 14 दिन बाद बड़े भाई की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत की सूचना परिवारीजनों को देर से मिली और इस दौरान शव का पोस्टमॉर्टम भी करा दिया गया।
बेटे की हुई मौत की जांच जब दिल्ली पुलिस ने अनसुना कर दिया तब पिता शव लेकर गांव चला आया और घर में ही डीप फ्रीजर लगाकर शव रख दिया। सेना से रिटायर्ड पिता थाने से लेकर उच्चाधिकारियों तक बेटे की मौत की जांच और शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग करता रहा, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
आलम यह है कि 14 दिनों से घर पर ही शव डीप फ्रीजर में रखा हुआ है।
कूरेभार थाना क्षेत्र के सरैया मझौवा के सूबेदार पाठक का पुरवा गांव निवासी शिव प्रसाद पाठक सेना में सूबेदार थे।
रिटायर होने के बाद वे गांव आ गए। शिव प्रसाद पाठक के परिवार में पत्नी के साथ ही दो बेटे शिवांक (32), इशांक और बेटी सुनीता व पूनम हैं। पिता ने दोनों बेटियों की शादी कर दी है। बड़ा बेटा शिवांक दिल्ली में वर्ष 2012 में एक कॉल सेंटर में नौकरी करता था। इस बीच शिवांक ने दिल्ली में 24 अप्रैल 2012 को एक व्यक्ति के साथ मिलकर कंपनी खोल ली।
कंपनी के पार्टनर ने दिल्ली की ही रहने वाली एक युवती को एचआर के पद पर नियुक्त किया था। शिव प्रसाद पाठक के अनुसार शिवांक ने युवती के साथ वर्ष 2013 में शादी कर ली थी। आरोप है कि कंपनी को मुनाफा होने पर पत्नी शिवांक पर कंपनी में अपने पिता व भाई को पार्टनर बनाने का दबाव बनाने लगी। दबाव में आकर शिवांक ने दो फ्लैट पत्नी के नाम कर दिया और एक कीमती कार व 85 लाख रुपये कीमत के आभूषण भी उसे दे दिया।
यह सब देने के बाद भी शिवांक के नाम काफी संपत्ति थी, जिस पर युवती व उसके परिवारीजनों की नजर थी। 19 जुलाई 2021 को शिवांक ने गांव में अपने छोटे भाई इशांक के पास फोन करके अपनी हत्या की आशंका जताते हुए पूरी बात बताई। इस पूरी बातचीत की रिकॉर्डिंग इशांक के पास मौजूद है। छोटे भाई इशांक के अनुसार एक अगस्त 2021 को दिल्ली में उसके भाई शिवांक पाठक की संदिग्ध हालत में मौत हो गई।
सूबेदार शिव प्रसाद पाठक ने बताया कि बेटे की मौत की सूचना उनके दामाद ने दी तो वे अपने छोटे बेटे इशांक के साथ दिल्ली पहुंचे और बेटे की हत्या किए जाने की तहरीर एसएचओ बेगमपुर दिल्ली को दिया, लेकिन पुलिस ने केस नहीं दर्ज किया। शव पोस्टमॉर्टम होने के बाद उन्हें सौंप दिया गया। इसके बाद परिवारीजन शव को लेकर तीन अगस्त को गांव आ गए।
बेटे की मौत से पर्दा उठाने के लिए पिता ने कूरेभार थाने की पुलिस को सूचना देते हुए दोबारा पोस्टमॉर्टम कराए जाने की बात कही, लेकिन उनकी एक न सुनी गई। इसके बाद पिता ने खुद ही डीप फ्रीजर खरीदकर घर पर ले आए और उसमें अपने जिगर के टुकड़े का शव रखकर इंसाफ की लड़ाई शुरू कर दी।
तीन अगस्त से लेकर नौ अगस्त तक लगातार रिटायर्ड सूबेदार स्थानीय थाना, एसपी और डीएम तक दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने और आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराने की मांग करते रहे, लेकिन उनकी एक न सुनी गई। थक-हारकर पिता ने न्याय के लिए दीवानी न्यायालय की शरण ली है।
कोर्ट में मामला: एसओ
सुल्तानपुर। एसओ कूरेभार श्रीराम पांडेय ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में है। दिल्ली में शिवांक की मौत होने के बाद पोस्टमॉर्टम कराया गया था। पोस्टमॉर्टम से शिव प्रसाद पाठक संतुष्ट नहीं थे, इसलिए वे दिल्ली कोर्ट गए थे। इसके बाद वे शव लेकर गांव आ गए और दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग पर अड़ गए। पूर्व में थानाध्यक्ष रहे अमरेंद्र बहादुर सिंह ने पूरा मामला जानने के बाद पोस्टमॉर्टम कराने से इंकार कर दिया था। मौजूदा समय में शिव प्रसाद पाठक दीवानी न्यायालय में केस दर्ज कराने व दोबारा पोस्टमार्टम कराने गए हैं। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। लिहाजा वे कुछ नहीं कर सकते।