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मुकम्मल तैयारियों ने रोक दी कोरोना की रफ्तार

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सुल्तानपुर। कोरोना संक्रमण की जंग में जिलाधिकारी सी. इंदुमती की छवि आयरन लेडी की बनकर उभरी है। प्रधानमंत्री ने जब 20 मार्च को जनता कर्फ्यू का एलान किया तभी डीएम ने उसकी गंभीरता भांप ली थी।
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तब लोगों को यह पता नहीं था कि लॉकडाउन होगा लेकिन जिला प्रशासन इस पर नजर रख अपनी रणनीति बनाता रहा। 21 मार्च को रातों-रात जिले का बॉर्डर सील कर दिया गया। 24 मार्च को जैसे ही पीएम की ओर से पहले चरण के लॉकडाउन का एलान हुआ तो रात से ही सब कुछ ठप हो गया।
डीएम ने सख्ती से लॉकडाउन का अनुपालन पहले चरण से शुरू कराया तो आज तक जारी है। उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है कि जिले में कोरोना की रफ्तार काफी हद तक न ियंत्रित है।
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लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही डीएम की ओर से पूर्व में तैयार डोर स्टेप प्रणाली की योजाना कारगर साबित हुई। शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए दूध, फल, सब्जी घर-घर पहुंचाने के लिए पास जारी हुए। दवाओं के लिए मेडिकल स्टोर खुले रखे गए।
दवा की दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग के लिए गोले बनाए गए। किराना दुकानें मोहल्लेवार चिह्नित करके खोली गईं। कालाबाजारी रोकने के लिए अधिकारी नियमित चेकिंग भी करते रहे। नतीजा यह रहा कि कहीं कोई दिक्कत नहीं आई।
डीएम सी. इंदुमती ने लॉकडाउन का पूरा अनुपालन हो सके इसके लिए सबसे पहले एक कंट्रोल रूम बनाया। कंट्रोल रूम की जानकारी मिलने पर लोगों की समस्याएं उस पर आती रहीं। डीएम स्वयं रोजाना कंट्रोल रूम में आई समस्याओं की मॉनीटरिंग करती रहीं।
इसके साथ ही जनता दर्शन, क्षेत्र भ्रमण, शेल्टर होम, कम्युनिटी किचन, रोड, मंडी, पीडीएस राशन के साथ ही गेहूं क्रय केंद्र तक का नियमित निरीक्षण किया। करके हकीकत से भी अवगत होती रहीं। सुबह नौ बजे कार्यालय पहुंचने वाली डीएम सी. इंदुमती रात के 11 बजे तक लगातार कार्य कर रही हैं। विशेष परिस्थिति में इसके बाद भी जागकर सरकारी कार्य निपटा रही हैं। अच्छे कार्य की वजह से शासन ने पहला मंडलीय एल वन हॉस्पिटल जिले में बनाया।
जिलाधिकारी सी. इंदुमती ने लॉकडाउन में इंसानों के साथ छुट्टा व गोवंश आश्रय स्थल में मौजूद जानवरों का भी ख्याल रखा। जानवरों की पेट भरने के लिए उन्होंने लोगों से भूसा दान करने की अपील की। इसके साथ ही कोरोना केयर फंड में धनराशि दान देने की भी अपील की। उनका प्रयास सफल रहा। जिले से ही कोरोना को मात देने के लिए कई करोड़ रुपया दान में पीएम व सीएम केयर फंड में गया। लोगों ने आगे बढकऱ भूसा भी दान किया।
विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने जान के साथ ही जहान बचाए रखने के लिए भी मशक्कत की। मनरेगा का कार्य जिले में सोशल डिस्टेसिंग के पालन के साथ चलता रहा। शासन का संकेत मिलते ही सुल्तानपुर-वाराणसी फोरलेन, पूर्वांचल एक्सप्रेस का काम भी शुरू करा दिया।
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