सुल्तानपुर। अब विज्ञान की पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। बच्चे सोलर कार दौड़ाने के साथ टेलीस्कोप बनाएंगे और मिट्टी-पानी की जांच कर प्रयोगों से विज्ञान के सिद्धांत समझेंगे। जिले के करीब 345 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ‘आओ करके सीखें’ पद्धति के तहत विद्यार्थियों को गतिविधि आधारित शिक्षा से जोड़ने की तैयारी है।
इसके तहत बच्चे 40 तरह के मॉडल और उपयोगी वस्तुएं बनाना सीखेंगे। इसका उद्देश्य उनमें वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना है।
बेसिक शिक्षा विभाग पढ़ाई को रोचक और व्यावहारिक बनाने पर जोर दे रहा है। इसके तहत विद्यार्थी विषयों को केवल याद करने के बजाय गतिविधियों के माध्यम से समझेंगे। मॉडल बनाने और प्रयोग करने के दौरान उन्हें सवाल पूछने, परिणाम जानने और अपने अनुभव से सीखने का अवसर मिलेगा।
विद्यार्थी सोलर कुकर, सोलर कार, दूरदर्शी टेलीस्कोप और एलईडी टॉर्च जैसे मॉडल तैयार करेंगे। मोबाइल प्रोजेक्टर बनाने के साथ प्लास्टिक की बोतलों से खिलौने बनाना भी सीखेंगे। मिट्टी और जल परीक्षण के जरिये पर्यावरण की जानकारी हासिल करेंगे। इन गतिविधियों से विज्ञान के सिद्धांतों को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ने में मदद मिलेगी।
चिक्की-अचार बनाने के साथ सीखेंगे कढ़ाई-सिलाई
गतिविधि आधारित शिक्षा में बच्चों को उपयोगी हुनर सिखाने पर भी जोर रहेगा। विद्यार्थी गुड़-मूंगफली की चिक्की और फल-सब्जियों का अचार बनाना सीखेंगे। इसके अलावा कढ़ाई-सिलाई तथा विद्यालयों में औषधीय पौधों का उद्यान विकसित करने की जानकारी दी जाएगी। इससे बच्चों को पर्यावरण संरक्षण और दैनिक जीवन में काम आने वाले कौशल सीखने का अवसर मिलेगा।
समूह में काम करने से बढ़ेगा सीखने का हुनर
बेसिक शिक्षा अधिकारी उपेंद्र गुप्ता ने बताया कि विद्यार्थियों को मॉडल बनाने और गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। समूह में काम करने से उनमें सहयोग और संवाद की भावना विकसित होगी। साथ ही नई चीजें सीखने में रुचि बढ़ेगी। पहल की सफलता के लिए गतिविधियों का नियमित संचालन, आवश्यक सामग्री की उपलब्धता और शिक्षकों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण होगा।