सुल्तानपुर। करीब 10 माह बाद बुधवार को जूनियर हाईस्कूलों में चहल-पहल दिखी। हालांकि पहले दिन विद्यालयों में बच्चों की नाममात्र उपस्थिति रही। स्कूल पहुंचने वाले बच्चे खुश नजर आए। पहले दिन रोटेशन के हिसाब से कक्षा आठ के बच्चे बुलाए गए थे लेकिन जानकारी के अभाव में कुछ विद्यालयों में सभी कक्षाओं के बच्चे पहुंच गए। विद्यालयों में एमडीएम बनाकर वितरित किया गया।
एमडीएम की गुणवत्ता परखने के लिए जिला समन्वयक एमडीएम संदीप यादव ने कूरेभार विकास खंड क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय ईरूल में बच्चों के साथ भोजन ग्रहण किया। खंड शिक्षाधिकारी भी अपने क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था का निरीक्षण करने निकले।
कुड़वार विकास खंड क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय देवलपुर प्रथम में बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों के अनुसार बैठाया गया था। मध्याह्न भोजन रसोई घर में बनता हुआ पाया गया। कुड़वार में ठंड से बचाव के लिए धूप में बच्चों को बिठाकर शिक्षिका पढ़ाती मिलीं। बहुबरा उच्च प्राथमिक विद्यालय में 40 बच्चे उपस्थित पाए गए। बच्चों को बैग व मोजा वितरित किया गया।
लंभुआ विकास खंड क्षेत्र के पब्लिक इंटर कॉलेज चौकिया में कक्षा आठ के बच्चे मास्क पहनकर विद्यालय पहुंचे। कोरोना काल के बाद बुधवार को जब उच्च प्राथमिक विद्यालय खोले गए तो कई स्कूलों में सभी कक्षाओं के बच्चे पहुंच गए। बच्चों को बताया गया कि वे कक्षाओं के लिए तय दिन को ही विद्यालय आएं। उच्च प्राथमिक विद्यालय लंभुआ प्रथम में नामांकित 89 विद्यार्थियों में से 30 बच्चे स्कूल पहुंचे।
दूबेपुर विकास खंड क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय धम्मौर में बच्चों के हाथों को सैनिटाइज कराने के बाद ही स्कूल में प्रवेश दिया गया। सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों को ध्यान में रखते हुए गोला बनाया गया। उन्हीं गोलों में बच्चों को पढ़ने के लिए बैठाया गया। मेन्यू के मुताबिक दूध व एमडीएम वितरित किया गया।
जयसिंहपुर तहसील क्षेत्र के विद्यालयों में सामाजिक दूरी के मानकों का अनुपालन करते हुए मध्याह्न भोजन वितरित किया गया। भारतीय लघु माध्यमिक विद्यालय गोसैसिंहपुर में पंगत में बैठकर बच्चों ने मध्याह्न भोजन ग्रहण किया। क्षेत्र के कई विद्यालयों में पहले दिन छात्र-छात्राओं में उत्साह रहा।
करौंदीकलां विकास खंड क्षेत्र के बांगरखुर्द गांव की निधि मिश्रा विद्यालय में पठन-पाठन शुरू होने पर काफी खुश नजर आईं। शहाबुद्दीन गांव के लकी सिंह ने कहा कि स्कूल खुलने पर बहुत अच्छा लग रहा है। शिक्षक के साथ बैठकर पढ़ने से जल्दी समझ में आता है। शहाबुद्दीनपुर गांव की आंचल पांडेय ने कहा कि पिछले 10 महीने से घर पर रहते-रहते जी ऊब गया था।
विद्यालय खुल जाने से मन खुश है। अब पढ़ाई-लिखाई में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए कठिन परिश्रम करूंगी। रमसापुर गांव के शिवम पाल बुधवार को विद्यालय पहुंचे। कहा कि बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। सत्र के बाकी महीनों के कोर्स को पूरा पढ़ने का प्रयास करूंगा।