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चंद्रबलि पाठक ने 1941 में फहरा दिया था तिरंगा

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सुल्तानपुर। देश को आजादी दिलाने वाले रणबांकुरों की चर्चा हो तो भदैंया के पंडित चंद्रबली पाठक का नाम जिले में शीर्ष पर रहता है। भदैंया के बभनगंवा निवासी पंडित चंद्रबली पाठक ने अपने हठीले स्वभाव व पराक्रम से अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देते हुए जब चौक घंटाघर में तिरंगा फहराया तो वह अंग्रेजों की आंखों में चुभ गए। फिर अंग्रेजों ने उनको कई बार जेल भेजकर यातनाएं दीं लेकिन उनके इरादे देश को आजादी दिलाने तक डिगे नहीं।
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गोमती नदी के किनारे बभनगंवा गांव में पंडित बालगोविंद के घर जन्मे चंद्रबली पढ़ने में होनहार थे। पढ़ाई के दौरान ही वह अंग्रेजों की ओर से भारतीयों पर हो रहे जुल्म सितम को देखकर विचलित हो गए और युवा होते-होते वे देश की आजादी की लड़ाई के रणबांकुरों के साथ हो लिए। 1921 से 1942 तक अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ वे हर आंदोलन में शामिल हुए।
1921 के असहयोग आंदोलन में वे पहली बार जेल तक पहुंचे। 1931 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और जुर्माना भी लगाया गया। 1932 में इनको दो बार छह-छह माह की सजा हुई। 1941 में इनको चौक घंटाघर में झंडा फहराने पर व्यक्तिगत आंदोलन के तहत गिरफ्तार कर 50 रुपये का जुर्माना कर जेल भेजा गया। जहां से छह माह बाद इनको नैनी जेल भेज दिया गया।
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1942 में देश में स्वतंत्रता आंदोलन तेजी से चल रहा था, उसमें जिले के युवाओं ने भी आगे बढ़कर अंग्रेजों के खिलाफ हल्ला बोल रखा था। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इनको अंग्रेजों ने एक साल तक नजरबंद कर दिया। इनके कहीं भी आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई। 1947 आते-आते स्वतंत्रता आंदोलन से अंग्रेजी हुकूमत हिल गई और देश की स्वतंत्रता के साक्षी पं. चंद्रबली पाठक भी बने।
उनके प्रपौत्र रोहित पाठक आज भी उनकी यादें संजोए हैं। देश आजाद होने पर 1952 में उनको कांग्रेस ने चांदा विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया लेकिन उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर टिकट वापस कर दिया और अपने मित्र पखरौली के स्वतंत्रता सेनानी उमादत्त राय को दिला दिया। उमादत्त चुनाव लड़कर क्षेत्र के पहले विधायक बने।
1967 में 79 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। आज भी पंडित चंद्रबली पाठक के नाम पर स्कूल, रास्ते व गोमती घाट है। क्षेत्र में उनको आदर्श मानने वालों की कमी नहीं है। पं. गंगेश मिश्र उनकी याद में हर साल नागपंचमी पर खेल प्रतियोगिता व दंगल का आयोजन करते हैं।
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