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दोस्तपुर के प्राचीन शाही पुल को जीर्णोद्धार की दरकार

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दोस्तपुर के मझुई नदी पर बना प्राचीन पुल। - फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। जिले की सबसे बड़ी नगर पंचायत दोस्तपुर की पहचान प्राचीन शाही पुल दुर्दशा का शिकार है। मुगलकाल का बताया जाने वाला यह पुल समय के साथ जर्जर हो गया है। सुल्तानपुर को अंबेडकरनगर जनपद से जोड़ने वाले पुल की एप्रोच वॉल टूटने से गत वर्ष से भारी वाहनों का प्रवेश इस पर वर्जित कर दिया गया। क्षेत्रीय लोगों ने इस प्राचीन पुल के जीर्णोद्धार की मांग को चुनावी मुद़्दा बनाया है।
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दोस्तपुर नगर पंचायत के उत्तर दिशा में अंबेडकरनगर की सीमा से गुुजरी मझुई (मंजूषा) नदी पर शाही पुल बना है। यह पुल मुगलकालीन बताया जाता है। पुल के बीच सफेद संगमरमर का एक शिलापट लगा है। लोग बताते हैं कि इस शिलापट पर अरबी भाषा में लिखा है कि इस पुल की मरम्मत औरंगजेब ने करवाई थी। पुल में लखावरी ईंट का प्रयोग किया गया है। इसकी जुड़ाई का कार्य भी विशेष प्रकार के मसाले से किया गया है। पुल के दोनों तरफ आठ-आठ कोठरियां बनी हुई हैं। इसमें जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। बताया जाता है कि पुल में ही राहगीरों के रुकने के लिए कोठरियां बनाई गई होंगीं। आवागमन के लिए इस पुल का प्रयोग दोस्तपुर के बढ़ौली, बम्हरौली, खालिसपुर, बसहा शाहपुर समेत अन्य गांव के लोग करते हैं।
वहीं, अंबेडकरनगर जनपद के उम्मरपुर, बेवाना, कैथावां, दियरा रसूलपुर, बनवां समेत अन्य गांव के लोग भी सुल्तानपुर आने-जाने के लिए करते हैं। क्षेत्र के रामभरत, मकबूल अहमद, राज कुमार गुप्ता, मनीष अग्रहरि, जगदीश तिवारी, कपूर चंद्र बरनवाल, अनिल मोदनवाल आदि ने बताया कि गत वर्ष बारिश के दौरान पुल की एप्रोच वॉल ढह गई थी। इसके बाद पुल की एप्रोच वॉल की मरम्मत कराई गई लेकिन अन्य कार्य नहीं करवाया गया। इसके बाद पुल पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई लेकिन पुल का जीर्णोद्धार नहीं कराया गया। इस पुल से अभी भी रोज बड़ी संख्या में दोनों जनपदों के लोगों का आवागमन होता है। इस बार के विधानसभा चुनाव में स्थानीय लोगों ने शाही पुल के जीर्णोद्धार की मांग को चुनावी मुद्दा बनाया है।
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