सुल्तानपुर। कोरोना काल में ब्लॉकों से भी एक और कोरोना किट महंगी दरों पर आपूर्ति कराए जाने का मामला सामने आया है। केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत कुछ फर्मों से सांठगांठ करके करीब 12 हजार रुपये में ग्राम पंचायतों को मास्क, सैनिटाइजर व स्प्रे मशीन की आपूर्ति करा दी गई है। आपूर्ति कराने के बाद ग्राम पंचायतों पर दबाव डालकर फर्म का भुगतान कराया गया। दूबेपुर विकास खंड में एक ही फर्म से करीब 35 ग्राम पंचायतों को कोरोना किट की आपूर्ति दिलाई गई है।
जिले से केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत कोरोना किट आपूर्ति का एक मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा था कि ब्लॉकों से भी केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत दूसरी कोरोना किट आपूर्ति का प्रकरण सामने आया है। इसकी शुरुआत दूबेपुर विकास खंड से हुई है।
बताया जा रहा है कि दूबेपुर विकास खंड में कुछ फर्मों से सांठगांठ करके अधिकांश ग्राम पंचायतों में महंगी दरों पर कोरोना किट की आपूर्ति अप्रैल व मई माह में करवा दी गई। करीब 12 हजार रुपये में ग्राम पंचायतों को मास्क, सैनिटाइजर व स्प्रे मशीन दी गई। दवा का छिड़काव करने के लिए स्प्रे मशीन दी गई। दूबेपुर विकास खंड में चार फर्मों से अधिकांश ग्राम पंचायतों में कोरोना किट की आपूर्ति कराई गई।
इसमें एक ही फर्म से करीब 35 ग्राम पंचायतों को मामूली कीमत वाली कोरोना किट 12 हजार रुपये में दी गई। आपूर्ति के समय एक क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रतिनिधि ने लिखित शिकायत करते हुए व कुछ ग्राम प्रधानों ने विरोध किया तो उन पर कार्रवाई कराने की धमकी दी गई। आपूर्ति के ग्राम पंचायतों व सेक्रेटरियों पर दबाव डालकर ऑनलाइन व्यवस्था के तहत भुगतान करा दिया गया।
दूबेपुर विकास खंड में 27 अप्रैल को छह, 28 अप्रैल को छह, 29 अप्रैल को तीन, 30 अप्रैल को पांच ग्राम पंचायतों का ऑनलाइन भुगतान कराया गया। इसी तरह मई, जून व जुलाई माह में भी भुगतान ऑनलाइन कराया गया। सूत्रों के मुताबिक एक फर्म ने कई विकास खंडों में कोरोना किट की आपूर्ति ब्लॉक के माध्यम से की है।
सेक्रेटरियों व ग्राम पंचायतों के मुताबिक ब्लॉक से आपूर्ति की गई कोरोना किट के सामानों की कीमत करीब ढाई से तीन हजार रुपये के आसपास है। जिले में पहले ही एक कोरोना किट मामले को लेकर मची हलचल के बाद दूसरा प्रकरण सामने आने पर अधिकारी व कर्मचारी इसे दबाने में लगे हैं। प्रकरण में दूबेपुर के प्रभारी खंड विकास अधिकारी संतोष कुमार गुप्ता आपूर्ति से इंकार कर रहे हैं।
मुख्य विकास अधिकारी अतुल वत्स ने कहा कि प्रकरण की जानकारी नहीं है। केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत यदि ब्लॉकों से महंगी दरों पर आपूर्ति कराई गई है तो इसका पता लगाया जाएगा। जानकारी मिलने पर उचित कदम उठाया जाएगा।