सामान्य वर्ग की महिलाओं के आरक्षित वर्ग के पुुरुष से शादी करने के बाद भी उसकी जाति आरक्षित वर्ग की नहीं मानी जाएगी। पंचायत चुनाव में ऐसी महिलाओं को शादी करने एवं गोद लेने से उसका लाभ नहीं मिलेगा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर पंचायत निर्वाचन आयोग ने जाति की स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। महिलाओं को उनकी पैदाइश वाली जाति का ही माना जाएगा।
पंचायत चुनाव में अनारक्षित वर्ग की महिलाओं से शादी करके या फिर ऐसी महिलाओं को गोद लेने के बाद भी उनकी जाति बदली हुई नहीं मानी जाएगी। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग में पैदा हुई महिलाओं की वही जाति मानी जाएगी। वे भले ही सामान्य (अनारक्षित) वर्ग के पुरुष से शादी कर लें लेकिन पंचायत निर्वाचन आयोग उन्हें सामान्य श्रेणी की नहीं मानेगा। कोई सामान्य वर्ग की महिला यदि आरक्षित वर्ग के पुरुष से शादी करती है तो भी उसे आरक्षण का लाभ चुनाव में नहीं मिलेगा।
इसी तरह सामान्य वर्ग की महिला को आरक्षित वर्ग के पुरुष की ओर से गोद लेने या फिर आरक्षित वर्ग की महिला को सामान्य वर्ग के गोद लेने के बाद भी उसकी जाति नहीं बदली मानी जाएगी। यानि कि महिलाओं की पैदाइश वाली जाति ही मानी जाएगी। वह जिस जाति में पैदा हुई है आयोग उसे उसी जाति का मानेगा। पंचायत चुनाव के पूर्व आयोग ने महिलाओं की जाति संबंधी स्थिति को साफ कर दिया है। आरक्षित वर्ग की महिला एवं पुरुषों को निर्वाचन में उम्मीदवार होने की दशा में अपना जाति प्रमाण पत्र देना होगा। जाति प्रमाण पत्र के आधार पर ही उसका लाभ मिलेगा।