ठीक 50 दिन बाद शनिवार को भाजपा नेता अनंत विक्रम सिंह जेल से बाहर आ गए। उन्होंने कहा कि पिता डॉ. संजय सिंह से कोई लड़ाई नहीं है। अमीता ने उन्हें बरगला रखा है। जेल जाने के बाद अमीता के प्रभाव के कारण पिता खुशी मना रहे थे, जबकि मीडिया के सामने पिता और अमीता ने कहा था कि मेरे जेल जाने से दोनों दुखी हैं। पर, दो दिन बाद दोनों लोग पार्टी कर रहे थे।
अनंत ने कहा कि आम आदमी दबाया जा रहा है। जितनी कठिनाई से मैं गुजरा हूं, मेरे लोग लोग गुजरे हैं, वह उसका परिणाम है। मेरी सक्रियता से सपा, कांग्रेस डरी हुई है। सपा, कांग्रेस और अमीता अपने लिए खुद गड्ढा खोद रहे हैं। जनता उसे भरने का काम कर रही है। हमने सच्चाई की स्थापना के लिए कसम खाई थी। आज उसका पहला दिन है।
भाजपा से मिलने वाले सपोर्ट के बाबत पूछे जाने पर अनंत विक्रम सिंह ने कहा कि लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के नेता उनके समर्थन में हैं। वस्तुस्थिति पूरी पार्टी जानती है। उन्होंने दावा किया कि उनकी बेल कंडीशनल नहीं है। मीडिया से बात करने के बाद अनंत विक्रम सिंह समर्थकों के साथ अमेठी के लिए रवाना हो गए।
बीते साल 14 सितंबर को भूपति भवन के सामने हुए बवाल में सिपाही विजय मिश्र की मौत हो गई थी। मामले में अनंत विक्रम सिंह समेत सात को नामजद करते हुए 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। कोर्ट ने 16 जून को अनंत विक्रम सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था।
वारंट जारी होने के बाद चार जुलाई को अनंत विक्रम सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था। जिला न्यायालय से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अनंत ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जमानत अर्जी दी थी। इस पर हाईकोर्ट ने उन्हें बीते 19 अगस्त को जमानत दे दी थी।