सुल्तानपुर। मुकदमेबाजी की रंजिश में अमरपाल की हत्या के 14 साल पुराने मामले में अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका। फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के न्यायाधीश स्वतंत्र प्रकाश ने सोमवार को सात आरोपियों को संदेह का लाभ दिया। अदालत ने दो सगे भाइयों समेत सभी सात आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
बल्दीराय के सतहरी निवासी राजपती ने 20 फरवरी 2010 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पति अमरपाल के खिलाफ राधेश्याम यादव ने 2007 में जानलेवा हमले की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी मुकदमे की रंजिश में अमरपाल की हत्या की साजिश रची गई। आठ जनवरी 2010 को अमरपाल मुकदमे की पेशी के लिए अदालत गए थे। आरोप है कि उनका अपहरण कर हत्या कर दी गई। अमरपाल का शव आठ दिन बाद अयोध्या जिले के हैदरगंज थाना क्षेत्र के घोंपा गांव के एक कुएं से मिला था। इस मामले में दुर्गा प्रसाद उपाध्याय, ऊषा और आरक्षी राम जगत तिवारी पर साजिश रचने का आरोप था।
पुलिस ने विवेचना के बाद सात लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। सतहरी निवासी राधेश्याम यादव और उनके भाई राजेश यादव शामिल थे। रामानंद यादव, दुर्गा प्रसाद उपाध्याय, पवन और सुक्खू भी आरोपी बनाए गए थे। हैदरगंज क्षेत्र के घोंपा डुहिया निवासी रामनाथ निषाद भी आरोपियों में से एक थे।