सुल्तानपुर। जिले की सड़कों पर गड्ढे हैं या फिर गड्ढे में सड़क, इन दिनों यह जान पाना मुश्किल हो गया है। शहर से ग्रामीण क्षेत्र व राजमार्ग से जिला व अन्य मार्ग की एक ही जैसी स्थिति बन गई है। बारिश में गड्ढे में पानी भर जाने से उसकी गहराई का अंदाजा लगा पाना मुश्किल हो गया है।
गड्ढे में गिरकर वाहन सवार रोजाना चोटिल हो रहे हैं। जिम्मेदार महकमे के अधिकारियों-कर्मचारियों ने कुछ जगहों पर ईंट व गिट्टी के टुकड़े डालकर मार्ग को और खतरनाक बना दिया है। ज्यादातर मार्गों पर यात्रा जोखिम भरी हो गई है।
शासन के निर्देश पर सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान प्रत्येक वर्ष चलाया जाता है। गड्ढा मुक्त के साथ मरम्मत, विशेष मरम्मत व सड़कों का नवनिर्माण भी कराया जा रहा है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में सिर्फ सड़कों की मरम्मत, विशेष मरम्मत, गड्ढा मुक्त व नवनिर्माण में करोड़ों रुपये गल रहे हैं।
प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करके संवारी व सुधारी जाने वाली सड़कों की गुणवत्ता की पोल बारिश ने खोल कर रख दे रही है। जिले में पहली बारिश में ही कोई सड़क छह माह तो कोई साल तो कोई दो-तीन व चार साल में ही गड्ढों में बदल गई। स्थिति से सड़क निर्माण व मरम्मत की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहा है।
सड़क निर्माण में लोक निर्माण विभाग के साथ ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, जिला पंचायत, नगर निकाय, मंडी परिषद समेत कई अन्य छोटी-छोटी कार्यदायी संस्थाएं लगी हैं। इसमें सर्वाधिक सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है।
वित्तीय वर्ष 2020-21 के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2021 तक सड़कों के निर्माण, मरम्मत, विशेष मरम्मत, नवनिर्माण समेत मार्ग के सुरक्षा मदों में करीब एक अरब 80 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। नोडल एजेंसी पीडब्ल्यूडी के मुताबिक इसमें सभी विभागों की ओर से सड़क पर खर्च की गई धनराशि शामिल है।
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के एक्सईसन व नोडल अधिकारी धर्मेंद्र कुमार अहिरवार ने बताया कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए मिट्टी की ढुलाई, मौजूदा समय में बारिश में जलभराव की वजह से सड़कें टूट गईं हैं। कुछ जगहों पर विभागीय सड़कों की मरम्मत का कार्य चल रहा है। बारिश थमने पर विभागीय मार्गों की मरम्मत कराई जाएगी।