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सनातन परंपरा में एक समान थे चारों वर्ण: राम भद्राचार्य

Sun, 19 Oct 2025 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
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सूरापुर। सनातन परंपरा में चारों वर्ण एक समान थे। न कोई ओबीसी था और न एससी। केवल चिल्लाने से हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा। हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए संसद में हिंदूवादियों की न्यूनतम 470 सीटें आनी चाहिए। यह बात तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी राम भद्राचार्य ने कहीं। वह विजेथुआ महोत्सव के नौवें दिन शनिवार को वाल्मीकि रामायण कथा सुना रहे थे।
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उन्होंने कहा कि आतंकवादी की कोई जाति नहीं होती। प्राचीन भारत में 18 स्मृतियां थीं, जो सनातन परंपरा का संविधान कहलाती थीं। इनमें समय-समय पर परिवर्तन भी होते रहे हैं। बिना कठोरता के नियंत्रण नहीं होता। भगवान राम ने शूर्पणखा को उस समय के प्रचलित व्यवस्था के अनुसार ही दंड दिलवाया था।
उन्होंने कहा कि दुष्कर्म करने वालों को प्राण दंड मिलना ही चाहिए। इसी लिए महात्मा गांधी को आदर्श मानने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा है कि गांधीजी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब संसद में प्रस्ताव पास करके रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाए। पत्नी शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि जो पति को पतन से बचाए, वही पत्नी है।
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कथा के शुभारंभ से पहले आयोजक विवेक तिवारी ने सपत्नीक व्यास पीठ का पूजन किया। तुलसी पीठ के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास ने गुरु अर्चन किया। कथा में न्यायाधीश इंद्रजीत, शांतनु महराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह विभाग संघ चालक हृदयराम यादव, विजय सिंह, ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह रवि सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।
विजेथुआ के विकास का पूरा प्रयास
विजेथुआ महोत्सव में पहुंचे राज्य सूचना आयुक्त वीरेंद्र सिंह वत्स ने कहा कि बजरंग बली भक्ति, त्याग, सेवा, संघर्ष और समर्पण के सर्वोच्च उदाहरण है। अपने इन्हीं गुणों के कारण उन्होंने आठ सिद्धियां और नौ निधियां अर्जित कीं। नई पीढ़ी को भक्ति, त्याग, सेवा, संघर्ष और समर्पण के मार्ग को अपनाना चाहिए। कहा कि अपनी क्षमता के मुताबिक उन्होंने विजेथुआ महावीरन धाम के विकास के लिए प्रयास किया है।
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