सुल्तानपुर। दिन में धूप भले ही निकल रही है, लेकिन ठंडी हवा से मौसम में गलन बरकरार है। सर्दी लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोज पांच से 10 डायरिया से पीड़ित मरीज आ रहे हैं, जिसमें बच्चों की संख्या अधिक है। उल्टी, दस्त, बुखार और खांसी-जुकाम के मरीज भी बढ़े हैं। चिकित्सकों का कहना है कि ठंड में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम करन ने बताया कि सर्दी में कोल्ड डायरिया का वायरस ज्यादा पाया जाता है। यह वायरस ठंड के दिनों में लोगों के शरीर में मुंह, नाक, कान व त्वचा के माध्यम से प्रवेश करता है। जिससे मरीज डायरिया की चपेट में आ जाता है। उन्होंने बताया कि डायरिया में रोगी को अधिक से अधिक मात्रा में पानी पिलाना चाहिए। नाक से वायरस का शरीर में प्रवेश होने पर सर्दी, जुकाम, निमोनिया हो जाता है। कान से वायरस शरीर में अगर प्रवेश करता है, तो वैसे व्यक्ति को लकवा मारने की संभावना बढ़ जाती है। त्वचा से शरीर में वायरस के प्रवेश करने पर व्यक्ति को कोल्ड स्ट्रोक होने की संभावना बढ़ जाती है।
मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. एसी गुप्ता ने बताया कि सर्दी-जुकाम के साथ दस्त के अलावा पेट में ऐंठन, मतली, उल्टी, बुखार, ठंड लगना, बार-बार पतला मल आना, पेट फूलना और पानी की कमी कोल्ड डायरिया के लक्षण हैं। शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने के लिए ओआरएस का घोल पिलाना बहुत जरूरी है। शरीर को ठीक होने के लिए पर्याप्त आराम दें।
मेडिकल कॉलेज में काउंटर पर दवा लेने के लिए कतार में खड़े मरीज व तीमारदार। संवाद
मेडिकल कॉलेज में काउंटर पर दवा लेने के लिए कतार में खड़े मरीज व तीमारदार। संवाद
मेडिकल कॉलेज में काउंटर पर दवा लेने के लिए कतार में खड़े मरीज व तीमारदार। संवाद
मेडिकल कॉलेज में काउंटर पर दवा लेने के लिए कतार में खड़े मरीज व तीमारदार। संवाद
मेडिकल कॉलेज में काउंटर पर दवा लेने के लिए कतार में खड़े मरीज व तीमारदार। संवाद