सुल्तानपुर। लंभुआ विकास खंड के लंभुआ ग्राम पंचायत में गठित समिति खंडित होने के बाद भी करीब साल भर से धनराशि की निकासी होती रही। समिति के एक सदस्य व सेक्रेेटरी पैसा निकालते रहे। मामला उच्च न्यायालय में पहुंचने पर सकते में आए पंचायतराज विभाग ने प्रभारी एडीओ पंचायत को निलंबित कर दिया। निलंबन के बाद उन्हें जयसिंहपुर से संबद्ध कर दिया गया है।
ग्रामीण फूलचंद्र जायसवाल की शिकायत पर पिछले वर्ष हुई जांच में लाखों की अनियमितता मिलने पर डीएम ने ग्राम प्रधान पूनम अग्रहरि का वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिया था। ग्राम पंचायत लंभुआ (कस्बे) में विकास कार्यों के संचालन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी थी।
समिति में लालजी यादव, साधना सोनी व जयशंकर को रखा गया था। पिछले साल ही समिति से पहले जयशंकर ने और बाद में साधना सोनी ने इस्तीफा दे दिया। जयशंकर के इस्तीफा देने व इसके बाद साधना सोनी के इस्तीफे के बाद भी गांव में विकास कार्य जारी रहना दर्शाया गया।
इकलौते बचे सदस्य लालजी यादव और सेक्रेटरी मुकेश कुमार के संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक खाते से सरकारी रकम का आहरण होता रहा। समिति खंडित होने के बाद भी धनराशि की निकासी किए जाने की शिकायत ग्राम पंचायत सदस्य साधना सोनी व ग्रामीण विजय प्रकाश श्रीवास्तव ने जिला पंचायत राज अधिकारी से की।
शिकायत पर डीपीआरओ ने प्रभारी सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) शशिकांत को 20 अगस्त व 14 सितंबर को मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया। डीपीआरओ के दोनों निर्देशों पर प्रभारी एडीओ पंचायत ने अमल नहीं किया और कार्रवाई दबाए रहे। इस बीच मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया।
प्रकरण उच्च न्यायालय पहुंचने के बाद पंचायतराज विभाग सक्रिय हो गया। मंगलवार को जिला पंचायतराज अधिकारी अविनाश कुमार ने प्रभारी एडीओ पंचायत शशिकांत को निलंबित कर दिया।
निलंबन में उन पर पर्यवेक्षण में लापरवाही व निर्देश का अनुपालन नहीं करने का आरोप लगा है। निलंबित करते हुए डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत को जयसिंहपुर विकास खंड से संबद्ध कर दिया है। उनकी जांच जयसिंपुर एडीओ पंचायत को सौंपी है।
लंभुआ। बीते साल 27 सितंबर को ग्राम पंचायत अधिकारी शशिकांत को सहायक विकास अधिकारी का दायित्व सौंपा गया था। एडीओ (पंचायत) का प्रभार मिलने के बाद भी शशिकांत की कार्यशैली से लोग संतुष्ट नहीं रहे। लापरवाही को लेकर वे अक्सर चर्चा में रहते थे।