कादीपुर (सुल्तानपुर)। आठ वर्ष पूर्व कादीपुर सीएचसी में आयोजित जिला अंधता निवारण नि:शुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन और लेंस प्रत्यारोपण शिविर में चिकित्सकों की लापरवाही से छिनी 10 लोगों की आंख की रोशनी के मामले में बुधवार को राज्य मानवाधिकार आयोग की टीम ने पीड़ितों का बयान दर्ज किया।
18 नवंबर 2005 से दिसंबर 2005 तक कादीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन एवं लेंस प्रत्यारोपण शिविर का आयोजन जिला अंधता निवारण समिति की ओर से किया गया था। डॉक्टरों एवं अन्य कर्मियों की लापरवाही से राम लखन वर्मा, वासुदेव वर्मा, सहाबुद्दीन, रम्मू, बंसू मौर्य, शोभावती, सिरताजी, इंद्रावती, नौरंगी, हरिराम बरनवाल के आंखों की रोशनी चली गई थी। आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. राकेश सिंह ने 2009 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जनहित याचिका दायर की थी। चार मार्च 2014 को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य मानवाधिकार आयोग मौके पर जाकर जांच करें और यह तय करे कि किस पीड़ित को कितना मुआवजा दिया जाए। कोर्ट के आदेश पर मंगलवार को राज्य मानवाधिकार आयोग के एडिशनल एसपी अमित मिश्रा के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम जिला मुख्यालय पहुंची थी। टीम ने सीएमओ दफ्तर के अभिलेखों की गहन छानबीन की थी। बुधवार को जांच टीम कादीपुर डाक बंगला पहुंची। टीम ने सीएचसी प्रभारी डॉ. डीके सिंह, तत्कालीन नेत्र सहायक बद्री नारायण और याचिका कर्ता डॉ. राकेश सिंह से मुलाकात कर उनका पक्ष लिया। इसके बाद जांच टीम सूरापुर पुलिस चौकी पहुंची। पुलिस चौकी पर जांच टीम ने बंसू मौर्य, सिरताजी और शोभावती का बयान लिया। जांच टीम को लोगों ने बताया कि आंख की रोशनी खोने वाले नौरंगी और हरिराम वर्मा की मौत हो गई है। इसके बाद टीम मृतकों के घर पहुंची और उनके परिवारीजनों का बयान लिया। जांच पूरी होने के बाद टीम वापस लखनऊ लौट गई।