सुल्तानपुर जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीज।
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सुल्तानपुर। जिला अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) खुद ही वेंटिलेटर पर है। यहां सरकार की ओर से मुहैया करवाई गई लाखों रुपये की मशीनें लंबे समय से धूल फांक रही हैं। कोरोना काल में इसे मरीजों के लिए आरक्षित किया गया था। वर्तमान समय में जिले में कोरोना का एक भी मरीज नहीं है। न ही कोई संक्रमित मिल रहा है। उसके बाद भी यह आज तक नहीं खुल सका है। ऐसे में चिकित्सकों को श्वांस के गंभीर मरीजों को भर्ती करने में परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल का आईसीयू वार्ड कुल नौ बेड का है। इसमें लगभग 35 लाख रुपये के उपकरण लगाए गए हैं, जो लंबे से बेकार पड़े हैं। कोरोना काल में जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड, आईसीयू और आपदा वार्ड को कोरोना के मरीजों के लिए आरक्षित किया गया था। तब से तीनों वार्ड आरक्षित चल रहे हैं। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में श्वांस की गंभीर परेशानी होने पर पहुंचने वाले मरीजों को आईसीयू वार्ड में भर्ती नहीं किया जा रहा है। मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में ही भर्ती कर ऑक्सीजन चढ़ाई जाती है। सर्दी के मौसम में इमरजेंसी वार्ड खचाखच भरा है। यदि आईसीयू वार्ड खोल दिया जाए तो उसमें श्वांस के मरीजों को भर्ती किया जा सकता है।
ओमिक्रॉन की आशंका को लेकर आईसीयू आरक्षित : सीएमएस
सुल्तानपुर। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एससी कौशल ने बताया कि पूर्व में कोरोना को देखते हुए जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड, आईसीयू और आपदा वार्ड को कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किया गया था। मौजूदा समय में ओमिक्रॉन की चेतावनी के बाद पूर्व में आरक्षित सभी वार्डों को पहले की तरह तैयार रखा गया है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ऑक्सीजन सप्लाई के साथ ही सेक्शन पाइप से श्वांस के मरीजों का उपचार किया जाता है। मरीजों को कोई परेशानी नहीं हो रही है।
ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखे गए श्वांस के मरीज
सुल्तानपुर। जिला अस्पताल में आईसीयू वार्ड बंद होने की वजह से गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के पलिया निवासी बुजुर्ग घेर्राऊ यादव (70), कलावती (68) निवासी रलही का पुरवा, योगेंद्र प्रसाद (70) निवासी कवरपुर कोतवाली लभुआ और कुड़वार के वारिकदेवन निवासी देवपति सिंह (70) को सांस लेने में दिक्कत और सीने में जकड़न होने पर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया है। चारों मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। चिकित्सकों के अनुसार आईसीयू वार्ड खुला होने पर मरीजों को और बेहतर उपचार मिल सकता था।