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एनपीएस खाते में नहीं पहुंचे 30 करोड़ रुपये

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सुल्तानपुर। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत जिले के लगभग 4200 शिक्षकों के वेतन से कटा अंशदान न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) खातों में नहीं पहुंचा है। यह धनराशि साल भर से ऊपर की बताई जा रही है। वेतन से कट रहे एनपीएस अंशदान खाते में नहीं पहुंचने से शिक्षकों में उहापोह की स्थिति है।
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जिले के 1735 परिषदीय प्राथमिक व 612 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 4200 शिक्षक ऐसे हैं, जो एनपीएस से आच्छादित हैं। इन शिक्षकों के मूल वेतन एवं महंगाई भत्ता का 10 फीसदी पैसा एनपीएस कटौती के रूप में प्रतिमाह कटता है। जून 2019 से एनपीएस का शिक्षकों का अंशदान तो प्रतिमाह वेतन से कट रहा है लेकिन ऑनलाइन चेक करने पर एनपीएस खातों में पैसा शो नहीं हो रहा है।
इसे लेकर शिक्षक असमंजस की स्थिति में हैं। उनका पैसा कहां अटका है, इसको लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है। 4200 शिक्षकों के औसतन 5000 रुपये कटौती के हिसाब से प्रतिमाह 2.10 करोड़ रुपये एनपीएस कटौती के रूप में काटे जा रहे हैं।
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14 माह की कटौती को जोड़ा जाए तो यह धनराशि लगभग 30 करोड़ रुपये पहुंचती है। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष दिलीप पांडेय, महामंत्री डॉ. एचबी सिंह ने कहा है कि हम सभी एनपीएस कटौती का शुरुआत से ही विरोध कर रहे हैं। एनपीएस का पैसा कहां अटका है, इसकी जांच होनी चाहिए। जब तक यह पैसा शो न हो, तब तक कटौती बंद की जानी चाहिए। शिक्षकों में अपने अंशदान को लेकर उहापोह की स्थिति ठीक नहीं है।
समय से नहीं मिलता सरकार का अंशदान
एनपीएस में शिक्षकों के मूल वेतन व महंगाई भत्ते का 10 फीसदी अंशदान जाता है। सरकार की ओर से शिक्षकों के मूल वेतन व महंगाई का 14 फीसदी अंशदान देना होता है। शिक्षकों के वेतन से एनपीएस कटौती तो समय से होती रहती है लेकिन सरकार का अंशदान समय से नहीं मिलता है।
बजट मिलते ही भेजा जाएगा पैसा
शिक्षकों के वेतन से एनपीएस के लिए जो कटौती प्रतिमाह हो रही है, उसका पैसा एनएसडीएल (राष्ट्रीय प्रतिभूति भंडार) खाते में भेजा जा रहा है। सरकार के अंशदान के रूप में तकरीबन 50 करोड़ रुपये मिलने थे। इसमें से अभी तक लगभग 25 फीसदी धनराशि ही मिल पाई है। पूरी धनराशि मिलते ही एनपीएस खातों में पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। शिक्षकों व कर्मचारियों को किसी भी प्रकार घबराने या आशंकित होने की जरूरत नहीं है।
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- सीएम शुक्ला, वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा विभाग
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