सुल्तानपुर। 169 करोड़ रुपये के बकाये में मनरेगा का कार्य लटक गया है। श्रमिकों का बकाया नहीं मिलने से मजदूर और भुगतान नहीं होने से सामग्री नहीं मिल पा रही है। नतीजा हुआ कि वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में श्रमिकों की संख्या कम हो गई है। विभाग की ओर से सिर्फ जल्द भुगतान का आश्वासन दिया जा रहा है।
मनरेगा से ग्राम पंचायतों में कराए जाने वाले विभिन्न कार्यों में लगने वाले सीमेंट, लोहा, मोरंग, इंटरलॉकिंग ईंट और सामान्य ईंट का भुगतान अगस्त 2024 से रुका है। विभाग की ओर से बढ़े कार्य कराने के दबाव से धीरे-धीरे सामग्री का बकाया मौजूदा समय में बढ़कर करीब 114 करोड़ रुपये हो गया है।
सात महीने से सामग्री मद के केंद्रीय खाते में धनराशि नहीं आने से दुकानों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। नतीजा हुआ कि अमृत सरोवर, इंटरलॉकिंग, खड़ंजा व भवन निर्माण का कार्य ठहर गया है।
मजदूरी का बकाया हुआ 55 करोड़
13 दिसंबर से श्रमिकों के केंद्रीय खाते में धनराशि नहीं आने से मनरेगा के मजदूरी का बकाया करीब 55 करोड़ रुपये हो गया है। तीन माह से भुगतान नहीं हाेने से मनरेगा के श्रमिकों की संख्या घटकर 29 हजार के पास पहुंच गई है। बुधवार को मनरेगा के विभिन्न कार्यों में लगी ऑनलाइन हाजिरी में 29,827 श्रमिक कार्य करते मिले हैं। बताया जा रहा है कि तीन माह से भुगतान नहीं होने से मजदूर उधारी में कार्य करने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
धनराशि आते ही मजदूरों के खाते में पहुंच जाएगा पैसा
मनरेगा उपायुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि श्रमिकों के भुगतान के लिए उनका डोंगल लगवा दिया गया है। धनराशि केंद्रीय खाते में आते ही मजदूरों का भुगतान उनके खाते में पहुंच जाएगा। सामग्री मद के भुगतान की मांग निदेशालय से की जा रही है।