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विश्वविद्यालय ने बढ़ाई फीस, छात्र-छात्राओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

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स्नातक पाठ्यक्रमों में परीक्षा शुल्क 480 से बढ़कर हुआ 800 रुपये, परास्नातक में 660 की जगह देने होंगे 1000 रुपये
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सुल्तानपुर। अवध विश्वविद्यालय ने संबद्ध महाविद्यालयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के विभिन्न शुल्कों में करीब दोगुना बढ़ोतरी कर दी है। परीक्षा शुल्क, नामांकन शुल्क, अंकपत्र शुल्क एवं क्रीड़ा शुल्कों में भारी वृद्धि से छात्र-छात्राओं के ऊपर नए शिक्षण सत्र में आर्थिक भार पड़ेगा। फीस वृद्धि से सुल्तानपुर और अमेठी के महाविद्यालयों के ढाई लाख से अधिक स्टूडेंट्स प्रभावित होंगे।

डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में अब विश्वविद्यालय में जमा किए जाने वाले शुल्कों में वृद्धि कर दी गई है। इससे पहले स्नातक कक्षाओं में प्रथम वर्ष में बच्चों को नामांकन शुल्क 150 रुपये देना होता था, जो अब बढ़कर 200 रुपये हो गया है।
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क्रीड़ा शुल्क अभी तक 15 रुपये जमा होता था, जो बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह उपाधि पत्र लेने के लिए पहले 250 रुपये जमा करने होते थे, जो अब स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में 500 रुपये जमा करने होंगे। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के शुल्क में भी वृद्धि कर दी गई है।

अब स्नातक स्तर पर व्यक्तिगत परीक्षार्थी को 1450 की जगह 1900 रुपये भुगतान करना होगा। स्नातकोत्तर कक्षाओं के परीक्षार्थियों को 1800 की जगह अब 2850 रुपये देना होगा। बैक पेपर में स्नातक कक्षाओं में पहले 800 रुपये जमा होता था, जो अब बढ़कर 1000 रुपये हो गया है।

स्नातकोत्तर कक्षाओं में यह शुल्क 1050 की जगह 1100 रुपये कर दिया गया है। शुल्क वृद्धि से सुल्तानपुर और अमेठी जिले के महाविद्यालयों के ढाई लाख से अधिक स्टूडेंट्स प्रभावित होंगे।

पंद्रह साल में तीसरी बार बढ़ा शुल्क
अवध विवि ने 15 वर्षों में तीसरी बार शुल्कों में वृद्धि की है। इसके पहले 2004-05 एवं 2013-14 में भी विवि ने परीक्षा शुल्क, नामांकन शुल्क, अंकपत्र शुल्क समेत कई मदों में फीस बढ़ाई थी। इस बार 28 मई को विवि की वित्त समिति ने विभिन्न शुल्कों का शुल्क का पुनर्निर्धारण कर दिया है।

यूनिवर्सिटी के वित्त अधिकारी लाल प्रताप सिंह ने सभी महाविद्यालयों को पत्र भेजकर बढ़ी दरों के मुताबिक शुल्क लेने का निर्देश दिया है।

महाविद्यालयों के शुल्कों का 15 वर्षों से पुनर्निर्धारण नहीं
जिले में पांच सहायता प्राप्त महाविद्यालय संचालित हैं, जहां लगभग 15 वर्षों से वही शुल्क लिया जा रहा है। इस दौरान बिजली की दरें कई बार बढ़ीं लेकिन महाविद्यालयों का पंखा शुल्क अभी भी पांच रुपये वार्षिक ही है। किताबों के दाम भले ही बढ़े हों लेकिन पुस्तकालय शुल्क 50 रुपये ही निर्धारित है।

इसी तरह प्रवेश शुल्क पांच रुपये, टीसी शुल्क तीन रुपये, क्रीड़ा शुल्क 35 रुपये निर्धारित है। प्रतिमाह स्नातक स्तर पर 11 रुपये व परास्नातक स्तर पर 15 रुपये शिक्षण शुल्क पिछले 15 सालों से लिया जा रहा है। कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान के प्राचार्य डॉ. राधेश्याम सिंह ने महाविद्यालयों के विकास के लिए शुल्कों को पुनर्निर्धारित किए जाने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि विवि में कई बार प्रत्यावेदन भी दिया गया लेकिन इस पर कोई निर्णय यूनिवर्सिटी स्तर पर नहीं लिया गया। राणा प्रताप पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि विवि जैसे अपने विकास के लिए शुल्क का पुनर्निर्धारण करता है, वैसे ही महाविद्यालयों के शुल्क भी पुनर्निर्धारित किए जाने चाहिए।
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गनपत सहाय पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि विवि को एडेड महाविद्यालयों की भी चिंता करनी चाहिए। शुल्कों का पुनर्निर्धारण किया जाना जरूरी है, ताकि संसाधनों का विकास किया जा सके।
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