कर्ज और बीमारी से तंग होकर सात दिन पहले खुदकुशी करने वाले यूपी के भीरा थाना क्षेत्र के ग्राम बस्तौली निवासी किसान सत्यपाल का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि मंगलवार की सुबह जिले के नीमगांव थाना क्षेत्र के ग्राम पकरिया निवासी गन्ना किसान छोटेलाल (45) ने भी गांव किनारे स्थित एक बाग में फांसी लगाकर खुदकुशी कर जिला प्रशासन को हिला दिया।
किसान के भाई अनोखेलाल ने बताया कि छोटेलाल का चीनी मिल कुंभी पर गन्ने का बकाया है। छोटेलाल करीब सवा एकड़ भूमि का स्वामी था। उसके पूरे खेत में गन्ना खड़ा है।
खबर लगते ही राजनैतिक दलों के नेता पहले उसके घर और फिर पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंच गए और घटना के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
छोटेलाल की पत्नी छोटी देवी रसोइया के पद पर कार्यरत है। करीब सवा साल से उसे मानदेय नहीं मिला है। छोटेलाल पर कुछ कर्ज भी था। छह माह पहले कृषि कार्य के दौरान चोट लगने से घायल भी हो गया था। उसके इलाज में भी काफी खर्चा आ रहा था। वह आर्थिक तंगी से गुजर रहा था।
भाई के मुताबिक उसकी तीन पुत्रियां और दो पुत्र हैं। घटना की सूचना मिलते ही भाजपा, कांग्रेस नेता किसान के घर पहुंचकर परिवार वालों को ढाढ़स बंधाया। इन नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के चलते जिले के दूसरे किसान ने आत्महत्या की है।
कड़ी सुरक्षा के बीच शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। एसपी ने बताया कि पति-पत्नी में कुछ अनबन भी हुई थी। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।
छोटी देवी, छोटेलाल की पत्नी के मुताबिक मेरे और पति के बीच कभी कोई लड़ाई नहीं हुई। उसे करीब डेढ़ साल से रसोइया का मानदेय नहीं मिला है। पति ने लड़ाई की पुलिस की बात पूरी तरह गलत है।