संयुक्त शोध पात्रता परीक्षा (सीईटी-2012) पास करने वाले 80 हजार प्रतिभागियों को झटका लगता दिख रहा है। निर्धारित अवधि के अंदर पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सभी विश्वविद्यालयों में दो-दो अवसर मिलना तो दूर एक मौका मिलने की भी उम्मीद नहीं दिख रही।
स्थिति यह है कि सर्टिफिकेट मिले तकरीबन पांच महीने हो चुके हैं लेकिन मात्र कानपुर विश्वविद्यालय ने ही दाखिले के लिए अभी तक आवेदन मांगा है। अन्य विश्वविद्यालयों की तरफ से कोई घोषणा नहीं की गई है। इससे पीएचडी करने के इच्छुक अभ्यर्थियों में नाराजगी के साथ निराशा भी है।
अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं
यूजीसी की नियमावली-2009 के अनुसार पीएचडी में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा अनिवार्य है। इसी के तहत राज्य विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए अप्रैल में संयुक्त पात्रता परीक्षा आयोजित की गई। इसका रिजल्ट भी जून में घोषित कर दिया गया लेकिन इसके बाद दो महीने तक आगे की प्रक्रिया को लेकर दुविधा बनी रही। हालांकि अगस्त में सफल अभ्यर्थियों को सर्टिफिकेट भेज दिए गए। यह भी तय हुआ कि आगे विश्वविद्यालय के स्तर पर प्रवेश लिया जाएगा।
हालांकि विश्वविद्यालय आगे कौन सी प्रक्रिया अपनाएंगे इसको लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके बाद भी अभ्यर्थियों की परेशानी दूर नहीं हुई। सर्टिफिकेट दो साल के लिए ही मान्य है। ऐसे में प्रतियोगियों को उम्मीद थी कि हर विश्वविद्यालय में उन्हें दाखिले के लिए कम से कम दो अवसर मिलेंगे लेकिन इस उम्मीद को झटका लगता दिख रहा है।
भविष्य को लेकर असमंजस
लखनऊ और गोरखपुर विश्वविद्यालय पहले ही इस परीक्षा से अलग हो चुके हैं। विद्यापीठ में भी इस साल पीएचडी पाठ्यक्रम में दाखिला नहीं लिए जाने की बात कही जा रही है। अन्य विश्वविद्यालयों में भी मात्र कानपुर विश्वविद्यालय की ओर से अभी तक आवेदन मांगा गया है, जिसकी आखिरी तारीख 31 दिसंबर है। मुश्किल यह कि उच्च शिक्षा निदेशालय के अफसर भी यह मामला अधिकार क्षेत्र में नहीं होने की बात कहकर कुछ भी बोलने से मना कर रहे हैं।
सीईटी पास अखिलेश का कहना है कि सर्टिफिकेट जारी हुए तकरीबन पांच महीने का समय बीत चुका है लेकिन मौका नहीं मिलने से उनके सामने दुविधा की स्थिति है। प्रतिमा का कहना है कि उन्होंने संगीत विषय से परीक्षा पास की है लेकिन कानपुर विश्वविद्यालय के विज्ञापन में यह विषय है ही नहीं। इस तरह से उन्हें अभी तक एक भी मौका नहीं मिल सका है। प्रतिमा नेट भी है लेकिन पीएचडी में प्रवेश नहीं होने के कारण भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है।