अखिलेश सरकार ने छात्रों को लैपटॉप मुफ्त में दिए, जबकि श्री सच्चा अध्यात्म संस्कृत महाविद्यालय का प्राचार्य हर लैपटॉप के बदले ढाई हजार रुपये वसूलने लगा।
मामले का खुलासा हुआ आम आदमी पार्टी के एक कार्यकर्ता ने स्टिंग आपरेशन में किया। डीएम के निर्देश पर इस मामले की एसडीएम ने जांच की।
इसमें पुलिस ने प्राचार्य व एक कर्मचारी पर मुकदमा दर्ज कर प्राचार्य को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि कर्मचारी फरार है।
श्री सच्चा अध्यात्म संस्कृत महाविद्यालय में 48 छात्रों को देने के लिए लैपटॉप आए हैं। इसके वितरण के एवज में प्रति लैपटॉप ढाई हजार रुपये वसूलने का पता चलने पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता अमित सिंह गत सोमवार को महाविद्यालय में पहुंचे।
उन्होंने महाविद्यालय के एक कर्मचारी से बात की, तो उसने यह कहते हुए ढाई हजार रुपये प्रति लैपटॉप सुविधा शुल्क की मांग की कि इसे ऊपर से नीचे तक सभी को देना है। जिस पर वे प्राचार्य विनय शुक्ला के पास पहुंचे।
प्राचार्य ने भी कर्मचारी द्वारा रुपये लेने की बात को सही ठहराया। जिस पर कार्यकर्ता अमित ने इसकी वीडियो रिकार्डिंग कर ली और उसकी सीडी अपने दिल्ली कार्यालय को भेज दी।
जब दिल्ली कार्यालय के नेताओं ने इस संबंध में जिलाधिकारी से बात की तो उन्होंने इस मामले की जांच के लिए एसडीएम को जांच के आदेश देकर दो दिनों में रिपोर्ट देने को कहा।
एसडीएम ने प्राचार्य विनय शुक्ला लैपटाप प्रकरण की विधिवत जांच की। जिसमें प्राचार्य व एक अन्य कर्मचारी मुराहू तिवारी दोषी मिले।
डीएम के निर्देश पर पुलिस बुधवार की सुबह दस बजे प्राचार्य विनय शुक्ला को विद्यालय परिसर से पूछताछ के लिए थाने ले आई।
एसडीएम स्वामीनाथ पाठक और पुलिस ने प्राचार्य से पूछताछ करने के बाद उनके और कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर प्राचार्य को जेल भेज दिया। दूसरा आरोपी फरार है।