अलग तेलंगाना राज्य के गठन का रास्ता साफ होने के बाद भले ही उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग जोर पकड़ रही हो, मगर इसके अंजाम तक पहुंचने की बात दूर की कौड़ी लग रही है।
दरअसल, प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी सपा ने साफ कह दिया है कि वह किसी भी सूरत में यूपी को बांटने का काम नहीं होने देगी। सपा के कड़े रुख को देखते हुए केंद्र सरकार के लिए भी प्रदेश के विभाजन की मांग को सिरे चढ़ाना असंभव लग रहा है।
साथ ही छोटे राज्यों की मुखालफत करते हुए सपा ने तेलंगाना के गठन का संसद में विरोध करने की रणनीति बनाई है।
तेलंगाना के गठन पर कांग्रेस की हरी झंडी के बाद उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो मायावती ने राजनीतिक दांव खेला है। मायावती ने कहा है कि छोटे राज्यों को बनने का रास्ता साफ होना चाहिए।
उन्होंने ही सबसे पहले प्रदेश की विधानसभा से यूपी को चार भागों में बांटने का प्रस्ताव मंजूर कर केंद्र को भेजा था। मगर मायावती के राजनीतिक मंसूबों को सपा ने यही रोक दिया है।
सपा ने साफ कर दिया है कि उसके सत्ता में रहते हुए यूपी को चार भागों में बांटा नहीं जा सकता। सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा है कि यूपी को चार भागों में बांटना प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के लिए भी ठीक नहीं है।
लिहाजा, पार्टी इसका विरोध करती है। यादव ने कहा कि तेलंगाना का गठन भी हितकारी फैसला नहीं है। उन्होंने कहा है कि पार्टी संसद में इस सिलसिले में बिल का विरोध करेगी।